मंगलवार, 9 दिसंबर 2014

Hindi Shayari

Meri Dorti Itni Aasan N Kr,,,, Itni Ssti Meri Phchan Na Kr,,, mt Punchh Mera Nam E Dost,,
Apni Yado Pr E Ehsan N Kr, //1//

E Dil Hai Dil Ko Dil Se Door Na Kr,,,, 
Mujhe Is Trh Se Majboor Na Kr,,,
Tu Bhi Tdpegi Ek N Ek Din Meri Yado Me,,,
E Mere Dost ! Itna Guroor Na Kr ,,//2//

Na Pyar , Pyar Ki Suruat N Sahi .... 
Na Vada, Vade Ki Mulakat Na Sahi...
Hm Fir Bhi Bhig Kr Ho Gayege Trbtr, 
Na Mile Tere Pyar Ki Brsat Na Sahi,  //3//

Is Trh Mt Hs Mere Dil Pr ,
Dil Ka Koi Kuroor  Nhi,,,,,,,
Vkt Kr Deta Hai Bechain 
Vrna Dil Mjboor Nhi ,,, //4//

Vkt Ayega To Mhfil Chhut Jayega, 
Apna Bhi Gair Bnkr Lut Jayega , 
Lukachhipi Mt Kr E  Dost .. Vrna Dil Nada Hai Ek Din Tut Jayega,,, //5//

Irada To Nhi Fir Bhi Irada Km Nhi Hota,,,,
Hjaro Dost Hai Fir Bhi Koi Hmdm Nhi Hota,,,,
Mile  Vo To Abhi Se Hi   Ruthne  Lgte,,,, 
Unhe Bhi Gm Nhi Hota Hme Bhi Gm Nhi Hota,,,, //6//
,,,,,,,

मंगलवार, 2 दिसंबर 2014

गजल।।हिसाब।।

गजल।।हिसाब।। कोई बात नहीं कि तू मुझे याद न कर ।। पर मेरे दिल को तो बर्बाद न कर ।। 1। काबिल तो छोड़ दे मुझे किसी औऱ के ।। जी लेगे खुद कोई फरियाद न कर ।। 2।। हस्र मेरा क्या होगा कुछ तो सोच ।। एक गम है उसे भी आजाद न कर 3।। माना कि वक्त कीमती है तेरा दोस्त !! पर मेरे भी वक्त को खराब न कर ।। 4।। यकीन हो ही जायेगा तेरी बेवफाई का ।। अभी से मेरी तन्हाई का हिसाब न कर ।।5।

सोमवार, 1 दिसंबर 2014

गजल।।एक दिल।।

              गजल ।।एक दिल।।

दिल एक था पर टुकड़े हजार हो गये ।।
जब हर जगह दिल के बाजार हो गये ।।1।।

ओश की तरह ढह गये छोड़ कर पलके ।।
अपने आसू भी आजकल गद्दार हो गये ।। 2।।

न जाने कितनी गुमनाम ही दफन हो गयी हसरते ।।
जख्म लगा तो दिल बेकार हो गये ।। 3।।

वक्त ही वक्त था पर अपना न था ।।
जब हम तन्हाई के शिकार हो गये ।।4।।

खत्म हो गया सिलसिला अपनाने का ए दोस्त !!
जब खुद ही बिछडने के आसार हो गये ।। 5।।


रविवार, 30 नवंबर 2014

।।तलाश।।

।। तलाश।। दोस्ती कर प्यार का एहसास न कर ।। हर किसी को इस तरह उदास न कर ।। 1 क्या मिलेगा सोच इस बेरुखी से दोस्त ! सब्र कर कुछ दोस्ती भी नाश न कर । 2।। अब तो प्यार के ही जबाने न रहे ।। सिर्फ बेरुखी मिलेगी प्रयास न कर ।। 3।। वरना फस ही जाओगे किसी की साजिश मे ।। वफा की तो बिल्कुल आश न कर ।। 4।। तेरे हाथ मे होगा तेरे ही आंख का आंसू ।। दोस्ती मे गम की तलाश न कर ।।5।।

शुक्रवार, 28 नवंबर 2014

वक्त

                 ।।वक्त।।


मंजिल दूर है तो क्या चल के आजमाना है ।।
वक्त भी कम है और खुद को भी बचाना है ।। 1।।

हौसला रखकर हमें भी जीत लेना है खुशी ।। 
और जिंदगी से किया वादा भी निभाना है ।। 2।।

क्या हुआ गर मिले आंख मे आंसू मुझे भी ।।
एक बार ही सही पर दिल को आजमाना है ।। 3।।

रस्तो पर ही रुके है जो समझ कर मंजिले ।।
रास्ता काफी अभी है उनको यह बताना है ।।  4।।

रास्ते इस जिंदगी पर लौटना मुमकिन नही ।।
वक्त से पहले हमें भी जिंदगी को पाना है ।। 5।।

डर

                   ।।डर।।


प्यार था पर प्यार मे इन्तकाम का डर था ।।
जो मिला बस उसी इल्जाम का डर था ।। 1

वरना फिक्र न करता मैं भी वफाओ की  ।।
जो हुआ बस उसी अंजाम का डर था ।। 2

तभी तो रह गये किनारों पर डूब कर ।।
नाम भी तो न मिला बदनाम का डर था ।। 3

औरों ने तो जी लिया खुशहाल जिंदगी ।।
मैं ढह गया जबकि मुझे ईमान का डर था ।। 4


ऐ दोस्त !! अब मत डर जीने से जिंदगी ।।
मैं रह गया क्योंकि मुझे अरमान का डर था ।।5

मंगलवार, 25 नवंबर 2014

।।दोस्ती:2।।

                 ।।दोस्ती:2।।


हर किसी ने कह दिया दोस्त है दोस्त है ।।
पर दोस्तों !! ए दोस्ती जीना सिखाती है ।।

गर नही तो फिक्र कर अब ही अपने दोस्तों की ।।
याद ही वह शौक है जो हमें अपना बनाती है ।। 


दोस्ती की दुकानों  पर मिले तो क्या हुआ ।।
दूर रहकर भी बडी दूरी मिटाती है ।।

इल्म कर ले हर कोई है दोस्त के काबिल ।।
गैर के खातिर ये तो किस्मत लुटाती है ।। 


कौन कहता है यहाँ मोहलत नहीं मिलती मुझे ।।
ये तो उम्र भर दिल में रहना सिखाती है ।।

बुधवार, 19 नवंबर 2014

।। एक दिन ।।।

।। एक दिन।। एक दिन तुम और हम चुप थे तभी तुम चले गये ।। 1 मैं तो रुका था दो पल नाउम्मीद तारे भी चले गये ।। 2 बस मे तब थे आंसू अपने बाद जा ने से चले गये ।।3।।

।। विश्वास ।।

।। विश्वास ।। रहने दो अब बहुत हो चुका प्यार अभी भी है सही नहीं है ।।। 1।। जोकि मेने और सभी ने सोचा था पर किया नही हैं ।।। 2 क्याकि मन मे और हृदय मे आशा है विश्वास नही है।।3।।

।।एक दिन ।।

।। एक दिन।। एक दिन तुम और हम चुप थे तभी तुम चले गये ।। 1 मैं तो रुका था दो पल नाउम्मीद तारे भी चले गये ।। 2 बस मे तब थे आंसू अपने बाद जा ने से चले गये ।।3।।

मंगलवार, 18 नवंबर 2014

।। उन्हें डर था ।।

           ।। उन्हें डर था ।।


उन्हें डर था  और मुझे भी ।
वे मुझसे डरते थे ,
मै खुद से डरता था ।। 1।।


कहीं वे खो न जायें आखो में ।।
औऱ मुझे मेरी ही ,
खबर न थी । 2।।


कुछ दिन परवाह किया मैने ।
और वो भी अब ,
वेपरवाह हो गए।। 3।।


हद हो गयी तब मेरे उम्मीद की ।
जब मुस्कुरा दिये ,
किसी गैर के होकर ।।4।।

शनिवार, 5 जुलाई 2014

वक्त और हिसाब


          गजल(वक्त और हिसाब)

वक्त भी कितना लाजवाब होता हैं .।।
किसी का दर्द तो किसी का ख्वाब होता हैं .। 


लाख गुनाहों से कर ले कोई पर्दा यहाँ ।।
इक न इक दिन वह बेनकाब होता ।।

अमन किसे मिलता हैं छीनकर गैरो की खुशियाँ ।।
जब अपने ही दिल से जबाब होता है ।।

तखलीफ़ तो होती ही है प्यार में ऐ दोस्त ।।  
मौसम तो हर वक्त लाजवाब होता हैं ।। 


फिक्र मतकर उनकी बेवफाई की ऐ दोस्त ।। 
वक्त आने पर पल पल का हिसाब होता हैं ।।

रविवार, 29 जून 2014

लत

              ।।गज़ल(लत)।।

लोग तो कहते हैं बड़ी बेकार की लत हैं ।। 
बड़ी मुश्किल है मुझे उनके प्यार की लत हैं ।। 1।। 

सुना है लत से हालत खराब होती हैं ।। 
फिर भी उनकी अदा पर इजहार की लत हैं ।।2।।

शिकायत उनकी कि हम पास नही आते ।। 
जबकि हर पल उन्हीं के इन्तजार की लत है ।।3।। 

तखलीफ़ मुझे भी है उनकी जुदाई का ।।
उन्हे भी मेरे प्यार पर ऐतबार की लत हैं ।।4।। 


तकदीर मे होगा तो मुमकिन होगा मिलन ।। 
अभी तो मेरे अश्कजार की लत हैं ।।5।। 
 

                      ***

गुरुवार, 26 जून 2014

गज़ल(एक तन्हा)

         ।।गज़ल(एक तन्हा) ।। 

हम तो कहते हैं हालात एक तन्हा है ।।  
इत्तफाको से मुलाकात एक तन्हा हैं ।।  1।। 

वक्त पर आये तो हैं वक्त की कीमत ।।
वेवक्त वक्त की तादात एक तन्हा है ।।  2।। 

जब विछडना ही है मुकद्दर मे मेरे लिखा ।। 
फिर तो जुदाई की हर बात एक तन्हा है ।। 3।। 

शिकायत क्यो कर तकदीर से अपने ।। 
इसकी तो हर वारदात एक तन्हा हैं ।। 4।। 

फिक्र मत कर दोस्त लौट कर फिर  आयेगे ।। 
आँखों से हुई हर बरसात एक तन्हा है ।।5।। 

                      ***

शनिवार, 14 जून 2014

।।गुनाह।।

               ।।  गुनाह।।

सिर्फ होठों पर मुस्कुराहट नही देखी जाती ।।
वक्त अपना हो तो राहत नही देखी जाती ।।1।।

जो दूर है यकीनन साथ न निभा पायेगे।।
उसके पास आने की आहट नही देखी जाती ।।2।। 

भले ही तुम उसे प्यार करते हो दिल से ।। 
पर बेकसी, बेबसी मे चाहत नही देखी जाती ।। 3।। 

ए दोस्त मत कर  गुनाह हमवफा बनने का ।।
हमवफा की छटपटाहट मुझसे नही देखी जाती ।।4।। 

                     ***

गुरुवार, 12 जून 2014

तन्हा

                ।।तन्हा।।
    

जब किसी का तन्हा बहुत करीब होता हैं ।।
तो वह पल भी कितना अजीब होता हैं ।।1।।

बदल जाती है उम्र भर की रौनक गम मे।। 
और एहसास भी काफ़ी कुछ गरीब होता है ।।2।। 

होने को तो होतीं हैं तनहाइयाँ उनके साथ ।।
पर मंजर हर हस्र का बेतरकीब होता है ।।3।। 

फिक्र न कर ऐ मेरे दोस्त इस दर्द की ।।
ये लम्हा किसी-किसी को ही नसीब होता हैं ।।4।। 

                     ***

मंगलवार, 10 जून 2014

।।सबब।।

                 ।।सबब।।

किसी आदमी को दिल-ए-दर्द जब होता हैं ।।
वही उसकी जिंदगी का सक्त  सबब होता है ।।1।।

सबक तो सीखते हैं हम ताउम्र तजुर्बे से ।। 
खुदगर्ज़ जिंदगी मे सही वक्त कब होता हैं ।। 2।। 

हम खुद को छोड़ करके ही तहकीक करते है ।।
न जाने गैरों मे क्यों इतना तलब होता हैं ।। 3।।

हमवफाओ की तो यहाँ परवाह नहीं जर से ।। 
हमदम, हमसफ़र का अब कहां अदब होता है ।।4।।  

पक्के है जिनके वादें, है आहों पे जिनकी मन्नत ।। 
इबादत है जिनकी असली उन्हीं का रब होता हैं ।।5।।

                        ***

शनिवार, 7 जून 2014

गर्म के मारे


                  ।।गर्म के मारे।।

ये दिल घायल हो गया जब गर्म के मारे ।। 
तरबतर तब हो गया मै शर्म के मारे ।।1।।

                                                                 
हद हो गयी जब मैंने अपना शर्ट निकाला ।। 
हैरान हैं सब लोग अपने मर्म के मारे ।।2।।

पानी पानी हो गया हर बूंद टपकने लगी ।। 
तब धूप शर्माने लगी निज कर्म के मारे ।।3।।

हर शाँप मे देखा, हर हर ढाबे मे ढूंढा ।।
फिर भी प्यास अधूरी रही इक टर्म के मारे ।।4।।

                         ***

बुधवार, 4 जून 2014

अंजाम-2

                  अंजाम

ए मेरे दोस्त! अंजाम की परवाह न कर ।।
वक्त आयेगा इंसाफ का गुनाह न कर ।। 1।।

और भी हैं यहाँ हालात के मारे मुसाफ़िर ।।
सिर्फ अपनी ख्वाहिशों को ही आगाह न कर ।।2।।

मन्नतो से बदल जाती है तकदीर यहाँ ।
बेमुरौवत से किसी पर निगाह न कर ।। 3।। 

गमो का आगाज़ न कर दिल के आशियाने मे ।।
किसी और के लिये भी गमो की चाह न। कर ।।4 ।। 

                       ***

सोमवार, 26 मई 2014

।।दोस्ती-2।।

                    ।।दोस्ती।। 

जिंदगी  मे  दोस्ती  आसान नही  होती ।।
बस दोस्त होना, दोस्ती की पहचान नही होती ।।1।।

दूर हो, या पास, या हो कोई अजनबी ।।
हर किसी से यह कभी अंजान नही होती ।। 2।।

फर्क कुछ पड़ता नहीं, हो फासले या दूरियां ।।
बेसलूकी पर यह मेहरबान नही होती  ।।3।। 

वसूलों की न सही पर फर्ज़ की जंजीर से  ।।
हैं जुड़ी, फिर भी कभी बेजान  नही  होती  ।।4। । 

प्यार  तो  रुस्वाइयोँ का   एक  लम्हा  हैं ।।
और दोस्ती प्यार पर एहसान नही होती ।।5 ।।

है दिलों की खुशनुमा यह इक तस्वीर वफा की ।।
यह दोस्ती हैं, दोस्त से परेशान नही होती  ।।6।। 
                       ***

शुक्रवार, 23 मई 2014

।।यादें।

                    ।।यादे।।
    

बड़ी बेशर्म है यादें बड़ी नफ़रत से आती है ।।
किसी को गम ये देती है किसी का गम भुलाती है ।।1।। 

लिहाजा गर न आये ये बड़ी दिक्कत भी होती है ।। 
किसी के दिल की आहट को यही आकर सुनाती है ।।2।। 

जरूरी है बहुत इसका मगर मजबूर कर देती ।।
रहोगे नींद मे फिर भी चली आहट सी आती हैं ।।3।। 

किसी से पूछ तुम लेना अगर न नींद आती हो ।। 
आती पल दो पल ही पर जीवन भर सतती है ।।4।। 

यादों का सफर है दोस्त ! मिलेगी न तुम्हें फुरसत ।।
मगर यादों में सबकी याद बड़ी मुददत से आती है ।।5।। 

                         ***

सोमवार, 19 मई 2014

जिंदगी

                   ।।जिंदगी ।।

जब हमने जीना चाहा कुछ खास  जिंदगी ।।
तब हमको लगी बिल्कुल बकवास  जिंदगी ।।1 ।

जिन पर यकी था मुझको बर्बाद कर गये ।।
अब कैसे करें गैरों पर बिश्वास जिंदगी ।।2।। 

हर अजनबी के तेवर हर दोस्तो की हरकत ।।
कर  रही है सब कुछ एहसास जिंदगी ।।3।।

मै ढूँढने निकला था खुद शाहिलो पर हमदम ।।
अब बन गयी है खुद ही तालाश जिंदगी ।।4।। 

यकीनन तुम्हें भी आ जायेगा यकी यारों ।। 
जब हो जायेगी  गम की आवास जिंदगी ।।5।। 

                       ***

रविवार, 18 मई 2014

दोस्ती

दोस्ती इक पल तो इन्तज़ार हम कर नही सकते कभी ताउम्र तो मुमकिन नही है इस हमारी दोस्ती में ।। 1।। फिर भी चाहेंगे तुमकों तुम्हारी तसल्ली के लिये , कि तुम्हें तखलीफ़ न हो इस हमारी दोस्ती मे ।।2।। क्योंकि वक्त तो अपना है नही ,जिंदगी है गैर की , सो इन्तजारो की जगह है न ,इस हमारी दोस्ती में ।।3।। पर यकीनन याद की इक शै जलाता है जिगर , और ताज़ी आहटे है इस हमारी दोस्ती मे ।।4।। लब्ज की कीमत दिलो से तौल ली जाती यहाँ पर, झूठ को मोहलत नही है इस हमारी दोस्ती मे ।।5।। ***

शनिवार, 17 मई 2014

हमदर्द


                  हमदर्द

तुम्हें तो इल्म नही होगा तुम्हारी खुशनसीबी पर ,
कि तुम्हारा नाम भी है हमारी बेमुरौवत जिंदगी मे ।। 1।। 

वरना किसे परवाह है गैरों की इस भीड़ में ,
जबकि महफिलों में भीडो के जलसे निकलते है ।।2।।

अगर हो पास इतना तो ये फासला क्यों है ,   
न जाने कब किसी का बिछड़ने का इरादा हो ।।3।। 

तुम्हें तखलीफ होगी पर तुम्हारी कद्र करता कौन हैं ,   
किसे फुर्सत यहां पर है तेरा हमदर्द बनने का ।।4।।

सहो हर दर्द अपना तुम किसी से गम को मत बाटो  ,
तुम्हारे दर्द का हमदम तुम्हारी जिंदगी ही हैं ।।5।।

                        ***

बुधवार, 23 अप्रैल 2014

अश्क़

                        अश्क

किसी हमराह से जाकर हमारी अनकही पूछो ,,
उसके अश्क कह देगें सारी दास्तां दिल की ।। 1।।

चले थे हम भी इक काफिले के साथ दोस्तों,, 
सिर्फ अश्क ही बचे सबके लौट कर लाने के लिये ।। 2।।

इन बुझदिलो की भीड़ में वफ़ा की उम्मीद न कर ,,
ये सब तो बेवफाई के अश्क से पलते है ।।3 ।।

प्यार में अश्कों  की कोई कीमत नही होती यहाँ ,,
बेवजह इन आँसुओं को बर्बाद न कर हमवफा ।।4।

                        ***

सोमवार, 7 अप्रैल 2014

* फेसबुक*

                 *फेसबुक*

बहुत आसान होता हैं किसी से दोस्ती करना ,
परन्तु दोस्त का मतलब हमे मालूम नही होता ।।1।।
                     ***

फेसबुक पर तो चैटिंग करते हैं बड़े प्यार से ,
सामने मिलते हैं तो नज़रे चुराते है ।।2।

                      ***

जानते हैं कि हर तस्वीर झूठी हैं फेसबुक की,
फिर भी वफाई की उम्मीद किये बैठे हैं ।।3।।
                     ***
गुजार देते हैं पूरी रात  नेट और फेसबुक पर ,
सुबह होते ही खुद से शिकायत करते हैं ।।4।।
                    ***

फेसबुक से कोई उम्मीद न कर ए मेरे दोस्त ,
हर किसी की ख्वाहिश यहाँ पूरी नहीं होती ।।5।।
 
                     ***

शुक्रवार, 4 अप्रैल 2014

*नाम*

                     *नाम*

बड़ा आसान होता हैं किसी से वायदा करना , 
ये वक्त है कि सबको झूठा बना देता हैं ।।1।।

                      ***

हमें अब सोचना होगा चुनावों के नतीजों पर ।।
वरना तुम्हारे नाम से कोई और जाना जायेगा ।।  2।।
                     ***

पहचानो तुम अपने ओट की कीमत यारों ।।
वक्त बदलेगा पर तुम्हारा नाम न होगा ।।3।।  
                     ***

आखिर क्यों लगाते है तुम्हारे ओट की की कीमत । 
जबकि मालूम हैं हर कोई बिकाऊ नही होता ।।4।।
                      ***

अगर तुम चाहते हो कि तुम्हारा नाम न डूबे ।।
अपने दिल की सुनकर के सही सरकार लाओ तुम ।।5।।

                      ***

बुधवार, 2 अप्रैल 2014

*इन्तज़ार*

                *इन्तज़ार*

तुम चाहते हो खेलना मेरे नादान दिल से , ।।
और मुझे भी उसी दिन का इन्तजार है ।।1 ।।
                    ***

जब बन ही गया है इरादा मेरा दिल तोड़ने  का ,।। 
तो झूठे प्यार मे अदायें क्यों दिखाती हो ।।2।।
                     ***

जब मुझे हाशिल न हो सकेगा तुम्हारा साथ , ।। 
तो मै तेरी याद का इन्तज़ार क्यों करूँ ।।3।।
                     ***

और खत्म हो गया तेरा इन्तज़ार करना ,।। 
क्योंकि मुझे भी फुर्सत नही अपने दिल के गमो से ।।4।।

                     ***

मंगलवार, 1 अप्रैल 2014

*वादा*

                    *वादा*

जब तुम ही चले गये दिल तोडकर मेरा , 
तो अब मै तुम्हारे वादे का क्या करूँ ।। 1।।

                     ***

फिर भी  प्यार है तेरी बेवफाई से मुझको ,
हैं  तेरा वादा तो मुझको निभाना होगा ।।2।।

                     ***

तुम तो चले गये इक वादा छोड़कर अपना ,
मुझे तो वादा करने का मौक़ा ही नहीं दिये ।। 3।।

                     ***

मेरा भी वादा हैं न भूल पायेंगे तुमकों तब तक ,
जब तक तेरी याद तक बेवफा न होगी ।।4।।

                     ***

*उम्मीद*

                *उम्मीद*

मुझे मालूम था कि खफ़ा होगे मुझसे ,
पर उम्मीद न थी उनसे बेवफाई की ।।1।।
                    ***

जब किस्मत ही आजमाने लगी हैं मुझको ,
तो तेरा आजमाना भी तेरी कसम वाजिब हैं  ।।2।।
                     ***

हर बार तो यही हुआ मेरे दिल के साथ ,
जब भी लगाया सिर्फ जख्म मिला हैं इसको ।। 3।।
                     ***
               
अब मेरी वजह से तखलीक न होगी तुमको ,
मेरी नाउम्मीदी पर खुशियाँ मना लेना तुम ।।4।।
                    ***

शनिवार, 29 मार्च 2014

*लम्हा*

                 *लम्हा*

हर लम्हे मे तेरे याद की सौगात हैं ।।
मै और मेरे दिल की नाजुक हालात हैं ।।1।।

अपने तकदीर की शिकवा करूँ मै कब तक।।
हर कोई गमगीन हैं जो भी मिला हैं अब तक ।।2।।

लम्हा लम्हा दिल पर मेरे मुस्कुराता हैं ।।
दिल तो बेबस हैं यहां तन्हा बिताता है ।।3।।

रंजिश तनिक नही हैं तन्हाइयों के मारे ।।
जब जिंदगी से जीते तो दिल्लगी से हारे ।।4।।

रविवार, 23 मार्च 2014

*नज़र*

                  *नज़र*

कभी जिनको नजरों मे छिपा रखा था मैंने  ,
वही गैरो के साथ मुस्कुराते नज़र आयें हैं ।।1।।
                     ***

बड़ी मुद्दत थी उन्हें दिल मे बसाने की कब से,
नज़र मिली तो चेहरा छिपा बैठे थे ।।2।।

                     ***

तखलीफ़ तो हुई उनकी बेहयाई से ,
उन्हें तो मौका मिला तन्हाई मिटा लेने का ।।3।।
                      ***         

बेकसूर थी नजरें जो उनकी चाह कर बैठी ,
कसूर तो दिल का हैं जो उन्हें अपना समझ बैठा ।। 4।।    

                       ***

*इश्क*

                 *इश्क*

बड़ी तखलीफ़ होगी सबाबे इश्क मे तुमको ,
प्यार को प्यार रहने दो इसे महसूस मत करो ।।1।।
                     ***

यदि फिर भी चाहते हो तसल्ली पाना तुम ,
वादा करो कि मुझसे शिकायत नही करोगे ।।2।।

                      ***

तसल्ली मिल जायेगी तुमकों भी राहे इश्क मे ,
पर हरपल दर्दे दिल मे तन्हाई बनी रहेगी ।।3।।
                      ***

हर मोड़ पर मंजिल नज़र तो आयेगी तुमको ,
पर इक कदम भी चलने का मौका नही मिलेगा ।।4।।

                       ***

शनिवार, 22 मार्च 2014

*शायरी-3*

                *शायरी-3*
उम्मीद तो हमें भी थी उनकी बेहयाई की,
खैरियत हैं कि उन्होंने पहले बता दिया ।। 1।।
                  ***
जब मैंने गुजारिश की उनसे प्यार की तो,
मुस्कुराकर बोले ,दिल तो आप का ही हैं ।।2।।

                  ***
आखिर क्या करूंगा मै उनका बेपरवाह दिल  ,
दूसरों के नाम पर धडकेगा तो जहमत होगी ।।3।।

                    ***
मैंने भी कह दिया उनसे गम नहीं हैं मुझको ,
तुम्हारी सहेली भी मुझे उतना ही प्यार करती हैं ।।4।।

                     ***

शनिवार, 15 फ़रवरी 2014

*आरज़ू*


लोग कहते हैं कि जिंदगी सवर जाती हैं ,
कोई मिल जायें तो जिँदगी गुजर जाती हैं
ऐ मेरे दोस्त कोई न मिले किसी से ,
वरना जीने की आरजू बिखर जाती हैं ,

                      ***

उन्हें प्यार करो और एतराज न हो ,
उनका इंतज़ार करो एतराज न हो ,
ऐ दोस्त गम मिले तो मिले मुझको ,
वे खुशियों की बौछार करें एतराज न हो ,

                      ***

हर सीने मे दिल धड़कने वाले हैं ,
हर चाहत मे लोग तडपने वाले है  ,
अधूरी रह जाती हैं आरज़ू ऐ दोस्त ,
मिलकर भी लोग बिछड़ने वाले हैं ,

                    ***
                   

*आरज़ू*


लोग कहते हैं कि जिंदगी सवर जाती हैं ,
कोई मिल जायें तो जिँदगी गुजर जाती हैं
ऐ मेरे दोस्त कोई न मिले किसी से ,
वरना जीने की आरजू बिखर जाती हैं ,

                      ***

उन्हें प्यार करो और एतराज न हो ,
उनका इंतज़ार करो एतराज न हो ,
ऐ दोस्त गम मिले तो मिले मुझको ,
वे खुशियों की बौछार करें एतराज न हो ,

                      ***

हर सीने मे दिल धड़कने वाले हैं ,
हर चाहत मे लोग तडपने वाले है  ,
अधूरी रह जाती हैं आरज़ू ऐ दोस्त ,
मिलकर भी लोग बिछड़ने वाले हैं ,

                    ***
                   

सोमवार, 10 फ़रवरी 2014

*शायरी-2*


                ***
दिल और दिल की बात  न कर ।
हर किसी से मुलाकात न कर ।
बेशक तन्हा ही है  तुम्हारे हिस्से मे ।
बेवजह आँशुओ को बर्बाद न कर ।

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बड़ी उम्मीद थी तेरे प्यार से मुझको ।
बड़ा प्यार था तेरी माशूमियत पर ।।
तोड़ दिया दिल मेरा तुमने आज ।
तरस आता हैं मुझे मेरी माशूमियत पर ।।

शनिवार, 8 फ़रवरी 2014

*शायरी -1*


हजारों बार गिरा हैं गुलदस्ता गुलदान से बाहर ।
करे क्या माली हवायें आ ही जाती हैं ।।

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गुजार देते हम भी तुम्हारे साथ कुछ पल ।
करे क्या जबाना मिलने नहीं देता ।।

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मिलेंगी वादियों मे मेरे आने की आहट ।
जरा गौर से सुनियेगा आवाज़ मद्दिम होगी ।।

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मजबूर दिल को बेदर्द मत समझना ।
दर्द होता हैं मगर कोई समझता नहीं ।।

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दिल को तसल्ली देता हूँ कि बरसेगा कभी सावन ।
पर बरसों गुजर गये सावने इन्तज़ार मे ।।

प्यार

वक्त ही काफ़ी नहीं इंतजार के लिए ।
लब्ज़ ही काफी नहीं इजहार के लिए ।
जिंदगी भी कम पड़ जाती हैं दोस्तो ,
सिर्फ दिल ही काफ़ी नहीं हैं प्यार के लिए ।।


vaqt hi kafi nhi intjar k liye .
lafj hi kafi nhi ijhar k liye .
jindgi bhi kam pad jati hai dosto,,
sirf dil hi kafi nhi hai pyar k liye ..




नशा ए इश्क

ग़ज़ल   नशा ए इश्क अब छोड़ा न जाए ।  जमाने से मगर उलझा न जाए ।   बड़ी मासूम हैं उसकी अदाएं,   कि मुझसे और अब देखा न जाए ।   गरीबों ...