बुधवार, 22 मार्च 2017

ग़ज़ल।अब तो हर तरफ तन्हाइयां नजर आती है ।

अब तो हर तरफ तन्हाइयां नजर आती हैं ।।
हर चाहत मे ,दिल मे रूस्वाइयां नजर आती हैं ।।1।।

मुर्झा गयी हर रौनक सूखे पत्तो की तरह ।।
हर रौनक मे भी परछाइयां  नजर आती हैं ।।2।।

मददिम हो गयी उनकी बेसव्रिया जब से ।।
तब से उनकी हरकतो मे बेहयाइया नज़र आती हैं।।3।।

फासले तो मिट गये पर शिकवा नही ।।
नजदीकियो मे भी जुदाइया नजर आती हैं ।।4।।

एहसास होता हैं उन्हें भी मेरे न होने का ।।
और जब होता हू तो अगड़ाइयां नज़र आती हैं ।।5।।

हर कोई बेखौफ हैं प्यार मे यहां पर ।।
फिर भी क्यों दिलो में सिसकारियां नजर आती हैं ।।6।।

हर शख्स का चेहरा हैं उतरा उतरा यहां ।।
हर किसी के दिल मे खामियां नज़र आती हैं ।।7।।।

हर रोज उनकी चाहत पर उठता हैं सवाल ।।
हर दिन उनकी अदा में नादानियाँ नज़र आती हैं ।।8।।

बड़ी उम्मीद थी उनसे प्यार निभ पाने की ।।
अब तो दोस्ती मे भी परेशानियां नज़र आती हैं ।।9।।

और कुछ भी नहीं हैं उनके दिल लगाने मे ।।
अब तो उनके आहट मे भी बदनामियाँ नज़र आती हैं ।।10।।

   --------Ram Kesh Miahra
।।

ग़ज़ल।रूठे हुये दिन हैं हर शाम बड़ी मुश्किल है ।


रूठे हुये दिन हैं हर शाम बड़ी मुश्किल है  ।।ं
तेरे दीदार के लिये इन्तजाम बड़ी मुश्किल हैं ।।1।।

वो सामने से निकलते हम छुप छुप के तड़पते हैं।
कहीं हो न जायें नाम बदनाम बड़ी मुश्किल हैं ।।2।।

दिल का चैन करार छीन लिया नजरों से ।
अभी पूंछते हैं बेवफाई का दाम बड़ी मुश्किल हैं ।।3।।

तीरेनजर से मेरे जख्मी हुआ उनका दिल ।
सर किसके जायें ए इल्जाम बड़ी मुश्किल हैं ।।4।।

अभी तो उनसे मिलना अभी तो बात करना हैं ।
अभी तो दिल मे रखना तमाम बड़ी मुश्किल हैं ।।5।।

न हमवफा हमारे न हमजिगर तुम्हारे हैं ।

कैस आये घर पर सरेआम बड़ी मुश्किल हैं ।।6।।

दिल के मेरे दोस्त तुम हो इतने दूर क्यों ।
पता नहीं कब क्या हो अन्जाम बड़ी मुश्किल हैं ।।7।।

बड़ी इन्तज़ारी के बाद कभी कभी मिलते हैं ।
अधूरा हैं 'आकाश' अरमान बड़ी मुश्किल हैं ।।8।।

हर साल मना लेते हैं नये वर्ष पर खुशियां वे।
जैसे करते हैं मुझपर एहसान बड़ी मुश्किल हैं।।9।।

हर साल मनाते हैं हरहाल मना लेने दो ।
यही हाल था दिल का परसाल बड़ी मुश्किल हैं ।।10।।

            -- -- Ram Kesh Mishra

शुक्रवार, 17 मार्च 2017

ग़ज़ल। हौसले मेरी जिंदगी के ।

    ग़ज़ल।हौसलें मेरी जिंदगी के।।

हौसलें मेरी ज़िंदगी के थे नही कमजोर इतने ।।
छा गये आंखों में आँसू आज क्यूँ घनघोर इतने ।। 

ऐ खुदा तू बुत बना बैठा है आख़िर आज क्यों ।
मैं लगा हारा हूं जबकि दम वफ़ा ऐ जोर इतने ।।

लुट गया मै दोस्ती से अब भरोसा उठ चला है ।
हो गये है हमवफ़ा ही हमसफ़र में चोर इतने ।। 

हक़ नही उनका है मुझपर अब मुहब्बत न रही ।
आरजू सब मिट गयी दिल गये झकझोर इतने ।।

ऱख दिया नाज़ुक से दिल को पत्थरों के बीच में ।
जर्रा जर्रा तक मिला न वार थे पुरज़ोर इतने ।। 

ख़ौफ़ दिल को था नही मौत से टकरा गया मै ।
उम्रभर फिसला ग़मो में दर्द के थे छोर इतने ।।  

ख़ून रकमिश बह चला है दोस्ती में दिल्लगी में ।
अश्क़ आँखों में हमारे रह गये अब थोर इतने ।।

                                 ©राम केश मिश्र

गुरुवार, 9 मार्च 2017

ग़ज़ल फ़िक्र में बर्बाद मैं तेरे।

                     ।।फिक्र।।

हो गया हूँ फ़िक्र से बर्बाद मैं तेरे ।।
नाम भी आया नही फरियाद में तेरे ।।1।।

अब दिलो के टूटने से दर्द क्या होगा ।।
जो मिला है अचानक बात में तेरे।।2।।

फर्क न पड़ता अगर तुम साथ न होते ।।
रूह भी कपने लगी अब याद से तेरे ।।3।।

दिल को रौंदा है नही पर टूटता जा रहा ।।
अब नयापन आ गया अनुबाद में तेरे ।।4।।

मिट गया होता कभी का फक्र से बेदम ।।
हू अभी जिन्दा उसी  सौगात में तेरे ।।5।।

कर यकी न रह सकोगे अकेले तुम ।।
साथ होंगे सब बड़ी तादात में तेरे ।।6।।

न रहूँ मै न सही पर तुम रहोगे खुश ।।
क्या करु मै बेवजह बारात में तेरे ।।7।।

इल्म होता है नही अब ख़ुदा व खुद पे।।
गम रहेगा अश्क को बरसात में तेरे ।।8।।

                         ***

ग़ज़ल।उन्हें मेरे प्यार की कीमत लगा लेने दो ।


उन्हें मेरे प्यार की कीमत लगा लेने दो  ।।
नये साल की हर खुशियाँ मना लेने दो ।।1//

इक जख्म सा होगा थोड़ी तखलीफ सी होगी ।
पर उन्हें मेरी हालात पर मुस्कुरा लेने दो ।।2//

एतबारी का सिलसिला तो मिट जायेगा कम से कम ।
मेरे नाम से नाउम्मीदी  का दीपक जला लेने ।।3//

बड़े दिन बाद अब तरसेगी मेरी आंखें ।
और उन्हें गैरो से आंखे तो मिला लेने दो ।।4//

उफ तक न करेगे इस तन्हा जिन्दगी से ।
गम के आंसुओ को आंखों मे जला लेने दो ।।5//

जब किस्मत ने ही आजमाया है मेरे दिल को ।।
तो उन्हें भी अपनी हसरत मिटा लेने दो ।।6//

मुझे उम्मीद है अपनी यादे न मिटा पायेगी ।
मेरी यादे चाहे छिपाना तो छिपा लेने दो ।।7//

मेरे दोस्तों ,मुझे यकीन हैं उनकी खुदगर्जी पर ।
अदा उनकी हैं चाहे तो दिखा लेने दो ।।8//

इस वर्ष उनके लिये मागेंगे दुआएँ रब से ।
भले ही मेरे लिये बद्दुआ मना लेने दो ।।9//

ऐ मेरे रहनुमा, मेरी चाहत अजीज दोस्तों ।
आज तो लम्हा लम्हा उनकी यादों मे गवा लेने दो ।।10!!

          ------Ram Kesh Mishra

ग़ज़ल।किस्ती का किनारा समझ बैठा मैं।

पहली नजर को सितारा समझ बैठा मै ।
तुम्हें अपनी किश्ती का किनारा समझ बैठा मै ।।1//

कल भी धोखा पाया था आपकी नज़र में ।
आज भी आपको सहारा समझ बैठा मै ।।2//

हर इम्तिहान पर लगा दी जान की बाजी ।/
तुम्हारे हर जख्म को नजारा समझ बैठा मै ।3//

हर इक नज़र के जख्म को दिखाता किसको ।
खुद को मौत का हारा समझ बैठा मै ।।4//

खुदा जाने मेरी बेपनाह मुहब्ब्त को ।
खुद को मुहब्ब्त का मारा समझ बैठा मै ।।5//

तुम्हारी आरजू को अपना तो लिया मैंने ।
जबकि खुद को बेगाना समझ बैठा मै ।।6//

सूरज सी रोशनी है तुम्हारी अदाओ मे ।
अपने ख्वाबो मे तुम्हें तारा समझ बैठा मै ।।7//

जबकि उठाई है उँगलिया तुमनें जबानें की तरफ ।।
अपनी मुहब्ब्त का इशारा समझ बैठा मै ।।8//

शिकवा नहीं हैं तुम्हारी मुहब्ब्त से "आकाश" ।।
अपने ही दिल को आवारा समझ बैठा मै ।।9//

           Ram Kesh Mishra
           Bhadaiyan,Sultanpur
    

ग़ज़ल।किस्ती का किनारा समझ बैठा मैं।

पहली नजर को सितारा समझ बैठा मै ।
तुम्हें अपनी किश्ती का किनारा समझ बैठा मै ।।1//

कल भी धोखा पाया था आपकी नज़र में ।
आज भी आपको सहारा समझ बैठा मै ।।2//

हर इम्तिहान पर लगा दी जान की बाजी ।/
तुम्हारे हर जख्म को नजारा समझ बैठा मै ।3//

हर इक नज़र के जख्म को दिखाता किसको ।
खुद को मौत का हारा समझ बैठा मै ।।4//

खुदा जाने मेरी बेपनाह मुहब्ब्त को ।
खुद को मुहब्ब्त का मारा समझ बैठा मै ।।5//

तुम्हारी आरजू को अपना तो लिया मैंने ।
जबकि खुद को बेगाना समझ बैठा मै ।।6//

सूरज सी रोशनी है तुम्हारी अदाओ मे ।
अपने ख्वाबो मे तुम्हें तारा समझ बैठा मै ।।7//

जबकि उठाई है उँगलिया तुमनें जबानें की तरफ ।।
अपनी मुहब्ब्त का इशारा समझ बैठा मै ।।8//

शिकवा नहीं हैं तुम्हारी मुहब्ब्त से "आकाश" ।।
अपने ही दिल को आवारा समझ बैठा मै ।।9//

           Ram Kesh Mishra
           Bhadaiyan,Sultanpur
    

ग़ज़ल।लौट ले आते नही राहों से बिछड़ने वाले।

लौट के आते नही राहों से गुजरने वाले ।
बड़ी मुद्दत से मिलते है दुनिया मे बिछड़ने वाले ।।1।।

दो चार दिन है जिन्दगी मे लुप्त लेने के लिये ।
उम्र भर मचलने नहीं हर दिल वो धडकने वाले ।।2//

वक्त का हैं तकाजा प्यार है तन्हाईयां हैं ।
टूटकर बिखर जाते है हर फूल महकने वाले ।।3//

जब तक हो सके चाहत सजोये रखना तुम ।
एक दिन बह जायेंगे आंसू वो सम्हलने वाले ।।4//

प्यार करना है अगर तो हौसला इतना रखो ।
दिल को दुखा जायेंगे ये दिल मे उतरने वाले ।।5//

हर वादा इक रास्ता है प्यार की मंजिल का ।
सकून नही पाते है वादो से मुकरने वाले ।।6//

बड़ा दर्द होता हैं जब आंसु छलकते है ।
फौलादी नहीं होते है कांटों पर निकलने वाले ।।7//

किसी अजनबी से दिल कैसे लगा ले कोई ।
बरसते नहीं है बादल बेमौसम में उमडने वाले ।।8//

लाख कर लो कोशिश दिल टूटने के बाद तुम ।
सजते नही हैं फिर से घर वो उजडने
वाले ।।9//

उम्र भर कुछ लम्हे ही साथ रह जायेंगे ।
साथ रह जायेंगे"आकाश"आंसू वो छलकने वाले ।।१०।।
  
         ----Ram Kesh Mishra

ग़ज़ल।लौट ले आते नही राहों से बिछड़ने वाले।

लौट के आते नही राहों से गुजरने वाले ।
बड़ी मुद्दत से मिलते है दुनिया मे बिछड़ने वाले ।।1।।

दो चार दिन है जिन्दगी मे लुप्त लेने के लिये ।
उम्र भर मचलने नहीं हर दिल वो धडकने वाले ।।2//

वक्त का हैं तकाजा प्यार है तन्हाईयां हैं ।
टूटकर बिखर जाते है हर फूल महकने वाले ।।3//

जब तक हो सके चाहत सजोये रखना तुम ।
एक दिन बह जायेंगे आंसू वो सम्हलने वाले ।।4//

प्यार करना है अगर तो हौसला इतना रखो ।
दिल को दुखा जायेंगे ये दिल मे उतरने वाले ।।5//

हर वादा इक रास्ता है प्यार की मंजिल का ।
सकून नही पाते है वादो से मुकरने वाले ।।6//

बड़ा दर्द होता हैं जब आंसु छलकते है ।
फौलादी नहीं होते है कांटों पर निकलने वाले ।।7//

किसी अजनबी से दिल कैसे लगा ले कोई ।
बरसते नहीं है बादल बेमौसम में उमडने वाले ।।8//

लाख कर लो कोशिश दिल टूटने के बाद तुम ।
सजते नही हैं फिर से घर वो उजडने
वाले ।।9//

उम्र भर कुछ लम्हे ही साथ रह जायेंगे ।
साथ रह जायेंगे"आकाश"आंसू वो छलकने वाले ।।१०।।
  
         ----Ram Kesh Mishra

ग़ज़ल।मैं एक दिया था बुझा दिया गया हूं ।

मै एक  दिया था बुझा  दिया  गया हूं ।
उनकी खैरात था लुटा दिया गया हूं।।

हौसला रखता था ए दिल मुहब्बत का।
पर एक मुकाम सा मिटा दिया गया हूं ।।

अब वही लिखता हू तन्हा के आंशुओ से
आपके गम से जो सिखा दिया गया हूं ।।

तब तो मेरे नाम की तारीफ होतीं थी ।
अब बदनाम इशारों से दिखा दिया गया हूं

दर व दर की ठोकरो से आज शाहिलो पर
बेकार आंसुओं सा गिरा दिया गया हूं  ।।

अब चर्चाओं मे मेरा जिक्र नही होता है ।
पुरानी यादो सा मै भुला दिया गया हूं ।।

हशीनाऔ की इक लम्बी दास्तां था मै ।
पर मुहम्बत के खत सा जला दिया गया हूं

मिलता था बेकरारियो मे भरोसा और हौशला ।।
रूस्वाइयो में शराबेगम पिला दिया गया हूं ।।

सकून आ गया जब दर्द बढ़ गया हद से ।
गम के मंजर में डुबो दिया गया हूं ।।

मेरी जिन्दगी इक मुहब्ब्त की मिसाल थी
अब बदनाम और बुझदिल बता दिया गया हूं ।।

               राम केश मिश्र
                भदैयां
                 सुल्तानपुर
                   मो.9125562266
                    

सोमवार, 6 मार्च 2017

ग़ज़ल।मौत को आजमाता जा रहा हूं ।

--------------------------ग़ज़ल-----------------------------

दर्द के क़ाबिल नही पर दर्द पाता जा रहा हूं ।
ऐ ख़ुदा तेरे प्यार में ग़म भुलाता जा रहा हूं ।।

इल्म दुनियां के सितम पर अब मुझे होने लगा ।
दर्द के नग़मे ख़ुसी में गुनगुनाता जा रहा हूं ।।

बंदिशों के बाद भी ये फँस गया कम्बख़्त दिल ।
हमवफ़ाई की सनक में दिल लगाता जा रहा हूं ।।

नासमझ हूं मैं या मेरा है जुनून ऐ इश्क बरपा ।
इश्क़ के हर मोड़ पर ज़ख़्म खाता जा रहा हूं ।।

दोगला इंसा जहाँ में बेवफ़ा खुदगर्ज़ निकला ।
पर वफ़ा में जिंदगी कोरी लुटाता जा रहा हूं ।।

देखकर रिस्तों में सौदा बिक रहा इंसान बेसक ।
लब्ज़ हैं ख़ामोश बस आंशू बहाता जा रहा हूं ।।

या ख़ुदा फैला अँधेरा लूटना लुटना मचा है ।।
देख दुनियां की हक़ीक़त मुस्कुराता जा रहा हूं ।।

हर जुबां ख़ंजर यहाँ रकमिश पुरानी धार है ।।
ज़िन्दगी पँर मौत को आजमाता जा रहा हूं ।

                            ©राम केश मिश्र

बुधवार, 1 मार्च 2017

ग़ज़ल।ऐ ख़ुदा तू पथ्थरे दिल ।


                          @ग़ज़ल@

नेक दिल ख़ून ए आँसू रो नही सकता कभी ।
ऐ ख़ुदा तू पथ्थरे दिल हो नही सकता कभी ।। 

ले रहा होगा मिरा तू इंतिहान- ऐ -सब्र  का ।
दो दिलों में फ़ासला यूँ बो नही सकता कभी ।। 

जिंदगी क़ुर्बान करने के लिये हाज़िर रहा हूं ।
दोस्ती में कर भरोसा खो नही सकता कभी ।।

दर्दे दिल नाज़ुक नही तो मौत क्यों ख़ामोश है ।
उम्रभर तकलीफ़ ऐ दिल ढ़ो नही सकता कभी । 

है सितम ये प्यार का तो मैं भी अब तैयार हूं ।
जान ऐ जां हाथ तुझसे धो नही सकता कभी ।। 

या इलाही तू मिला दे उस मुक़म्मल रूह से ।
चैन की इक नींद रक' सो नही सकता कभी ।। 

                        © राम केश मिश्र



नशा ए इश्क

ग़ज़ल   नशा ए इश्क अब छोड़ा न जाए ।  जमाने से मगर उलझा न जाए ।   बड़ी मासूम हैं उसकी अदाएं,   कि मुझसे और अब देखा न जाए ।   गरीबों ...