बुधवार, 1 मार्च 2017

ग़ज़ल।ऐ ख़ुदा तू पथ्थरे दिल ।


                          @ग़ज़ल@

नेक दिल ख़ून ए आँसू रो नही सकता कभी ।
ऐ ख़ुदा तू पथ्थरे दिल हो नही सकता कभी ।। 

ले रहा होगा मिरा तू इंतिहान- ऐ -सब्र  का ।
दो दिलों में फ़ासला यूँ बो नही सकता कभी ।। 

जिंदगी क़ुर्बान करने के लिये हाज़िर रहा हूं ।
दोस्ती में कर भरोसा खो नही सकता कभी ।।

दर्दे दिल नाज़ुक नही तो मौत क्यों ख़ामोश है ।
उम्रभर तकलीफ़ ऐ दिल ढ़ो नही सकता कभी । 

है सितम ये प्यार का तो मैं भी अब तैयार हूं ।
जान ऐ जां हाथ तुझसे धो नही सकता कभी ।। 

या इलाही तू मिला दे उस मुक़म्मल रूह से ।
चैन की इक नींद रक' सो नही सकता कभी ।। 

                        © राम केश मिश्र



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