सोमवार, 9 जनवरी 2017

ग़ज़ल।मैं भी सितारा था।

             ग़ज़ल।मैं भी सितारा।

मैं भी था सितारों में जगमगाने वालों ।।
थम जाने दो आंशू गीत गाने वालो ।।

अपने लब्ज़ो की बात तो बया कर दू ।
सुना देना तुम भी किस्सा सुनाने वालों ।।

मुश्किलें बहुत हैं अब तो समझ जाओ ।
कब समझोगे मुझको गम में रुलाने वालों ।।

जिन्दा रहा तो जिंदगी बेमौत मार डाली ।
सुन मेरे ज़नाज़े पर यूँ मुस्कराने वालों ।।

मेरी ह्मवफ़ा पर यक़ीन नही है तुमको ।
अपनी बेवफ़ाई पर भी मुस्कराने वालों ।।

अपनी आज़ादी की खुशियां मना लेना तुम ।
आग मद्दिम ही लगाना जिन्दा जलाने वालों ।।

कुछ संगदिल भी देखेगे उस धुँये का जलवा ।
आ गये थे कब्र पर खुसबू चढ़ाने वालों ।।

कब तलक लड़ता मैं वक्त की उस मार से ।
दुश्मनों से मिल गये मुझको जिलाने वालों ।।

जनाजा तो निकल गया इंतक़ामे प्यार में ।
तुम्हारे सिर्फ आँसू ,ऐ आंशू बहाने वालों ।।

बुझेगा नही धुँआ ये आकाश तक जायेगा ।
सितारों में रहूंगा मैं ऐ मुझको मिटाने वालों ।

कही न झुके सर मुहब्बत के शिवा रकमिश ।
देता हूं दुआ कब्र पर सर को झुकाने वालों ।। 

                               राम केश मिश्र

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