गुरुवार, 14 मई 2015

।।गजल।।दूर के रिश्ते थे ।।

     ।।गजल।।दूर के रिश्ते थे।।

प्यार था पर प्यार में दूर के रिश्ते थे ।।
तुम पर ऐतबार था पर दूर के रिश्ते थे ।।

वक्त मेरे पास भी कम था और तेरे पास भी ।।
दिल ही गुनेहगार था कि दूर के रिश्ते थे ।। 

तू मिलना चाहती थी हर फासलों पर मुझसे ।।
और मैं भी बेकरार था कि दूर के रिश्ते थे ।।

वजह तुमने छिपाया क्यों हमारे प्यार केखातिर।।
बहाना तो हजार था कि दूर के रिश्ते थे ।।

यकीनन मैं कभी भी न तुमसे रूठ पाया था।।
खत्म हो ही गया इंतजार कि दूर के रिश्ते थे ।।

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मंगलवार, 5 मई 2015

शायरी

�� न वफ़ा न गम न प्यार का गुलाम होता है ।।
न याद न दर्द न इंतजार का गुलाम होता है ।।
ऐ मेरे दोस्तों यें वसूल है जिंदगी का कि ।।
आदमी वक्त और हालात का गुलाम होता है ।।
                 ������

�� हालात बदल गये तो जज़्बात का डर है ।।
��इरादे बदल गये तो मुलाकात का डर है ।।
��न मिले कभी कोई फर्क नही दोस्तों ।।
��मिल के न मिले इस बात का डर है ।।

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नशा ए इश्क

ग़ज़ल   नशा ए इश्क अब छोड़ा न जाए ।  जमाने से मगर उलझा न जाए ।   बड़ी मासूम हैं उसकी अदाएं,   कि मुझसे और अब देखा न जाए ।   गरीबों ...