गुरुवार, 14 मई 2015

।।गजल।।दूर के रिश्ते थे ।।

     ।।गजल।।दूर के रिश्ते थे।।

प्यार था पर प्यार में दूर के रिश्ते थे ।।
तुम पर ऐतबार था पर दूर के रिश्ते थे ।।

वक्त मेरे पास भी कम था और तेरे पास भी ।।
दिल ही गुनेहगार था कि दूर के रिश्ते थे ।। 

तू मिलना चाहती थी हर फासलों पर मुझसे ।।
और मैं भी बेकरार था कि दूर के रिश्ते थे ।।

वजह तुमने छिपाया क्यों हमारे प्यार केखातिर।।
बहाना तो हजार था कि दूर के रिश्ते थे ।।

यकीनन मैं कभी भी न तुमसे रूठ पाया था।।
खत्म हो ही गया इंतजार कि दूर के रिश्ते थे ।।

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