शनिवार, 29 अगस्त 2015

।।ग़ज़ल।।कोशिसे बेकार निकली।।

  ।।ग़ज़ल।।कोशिस बेकार निकली।।


तुम्हे चाहने की मेरी हर कोशिस बेकार निकली ।।
तेरी बेचैनी भी तेरे दिल की वफादार निकली ।।

थकती तो नही है ये नज़र तेरा चेहरा निहारकर ।।
पर तेरी ख़ामोशी पर मेरी हर नज़र बेजार  निकली ।।

इंतजार तेरे इशारों का करता ही रह गया मैं ।।
न जाने किस वज़ह से तू गुमसुदा हर बार निकली ।।

माना कि बेअसर रह गयी हो मेरी चाहते ऐ दोस्त ।।
पर तेरी लापरवाही तो काफ़ी असरदार निकली ।।

काश! कि तुम सुरुआत ही न करने दिये होते मुझे ।।
सम्हल जाता पर तू बेवफा ही आखिरकार निकली ।।

                          .......R.K.M

गुरुवार, 27 अगस्त 2015

।।ग़ज़ल।।मुझे मालुम है।।

      ।।ग़ज़ल।।मुझे मालुम है।।


मेरे ख्वाबो में तेरा चेहरा नजर आयेगा मुझे मालुम है ।।
आज फिर से वही दर्द उभर आयेगा मुझे मालुम है ।।

मेरी तकलीफ का एहसास हो न हो तुम्हे ऐ मेरे दोस्त।।
मेरी मुहब्बत का एहसास तुम्हे होगा मुझे मालुम है ।।

मेरे बहते अश्क पर मुझको भरोसा हो गया अब ।।
उभरेंगे तेरे आँख में भी आंसू मुझे मालुम है ।। 

अब मुफ़्त में तो यहा नशीहते भी नही मिलती है ।।
मैंने तो अपनी जिंदगी ही लुटा दी मुझे मालुम है ।।

इल्म कर तेरी आजमाइस पर कुर्बान कर दी जिंदगी ये।।
यकीनन मेरी ख़ामोशी का असर होगा मुझे मालुम है ।।

ऐ दोस्त तू मिले ,न मिले ,फिर भी कोई बात नही ।।
पर अब मैं तेरा ही होकर जिऊँगा मुझे मालुम है ।।

                         ........R.K.M

रविवार, 23 अगस्त 2015

।।ग़ज़ल।।मुस्कराया न कर।।

      ।।गजल।।मुस्कराया न कर।।


अब रहने भी दे तू मुझे तड़पाया न कर ।
अपनी यादो के तूँफा से रुलाया न कर ।।

फ़िक्र तो कर मेरे दिल के हालात की अब
उन झूठी अदायें को अब दिखाया न कर।

मेरी दिल की चाहत का तुझे एहसास नही
तो मेरे स्वप्नों में आकर मुस्कुराया न कर ।

ख़त्म हो ही जायेगा तख़लीफो का दौर ।
अब मेरी मुहब्बत को तू आजमाया न कर

ऐ दोस्त तुम्हे हक है तेरी जिंदगी जीने का। 
मज़ाक मेरी जिंदगी का भी उड़ाया न कर।

                           ......R.K.M

।।ग़ज़ल।।हालात के चलते मैं।।

   ।।ग़ज़ल।।हालात के चलते मैं।।


तुमसे दूर हूँ तेरे जज़्बात के चलते मैं ।।
खुद से मजबूर हूँ हालात के चलते मैं।।

कोई गम नही तू मुझे याद कर न कर ।।
भीगता हर ऱोज हूँ बरसात के चलते मैं ।

ठहर क्यों जाती हो मेरे दायरे के बाहर ।।
वादा तोड़ न पाया तेरी बात के चलते मैं।

मुफ़्त में उम्र गुजार देना भी गुनाह है ।।
पर रोक न पाया औकात के चलते मैं ।।

ऐ दोस्त रब मिले न मिले तू चली आना ।
तन्हा ही रह जाउगा सौगात के चलते मैं।

                               .......R.K.M

मंगलवार, 18 अगस्त 2015

।।ग़ज़ल।।तन्हा बिताये तो थे।।

।।ग़ज़ल।।तन्हा बिताये तो थे।।


कुछ भी हो, मेरी ख़्वाहिशों के ,लिये मुस्कराये तो थे ।।
कल मेरी यादो से निकलकर, सामने आये तो थे ।।

माना कि वो तब्दीली न आ सकी उनकी अदाओ में ।।
पर मिटाकर फ़ासलों का दर्द, नजरें झुकाये तो थे ।।

जो चले ही गये थे दूर ,मेरे दिल के दायरों से ।।
तोड़कर दुनिया की रश्मे ,वादा निभाये तो थे ।।

अब मुझे यक़ीन है कि मेरी चाहते बेअसर न रही ।।
वक्त कम था और हम भी दिल को लुटाये तो थे ।।

ऐ दोस्त ! तमाम लोग थे ,तेरे जाने के बाद भी यहा ।।
पर तेरी याद में हम ,तन्हा तन्हा बिताये तो थे ।।

                       ...........R.K.M

।।ग़ज़ल।।मुझे मंजूर नही।।

       ।।ग़ज़ल।।मुझे मन्जूर नही।।

तू मेरी जन्नत है पर तेरा कोई कसूर नही ।।
मैं हाथ रख दूँ ,तू जल जाये ,मुझे मंजूर नही ।। 

कसूर ख़ुदा का है ,कोई तो नाम देता इस रिश्ते को ।।
मेरा दिल ,मेरी आँखे ,मैं खुद, भी बेक़सूर नही

फ़िक्र मत कर ,कोई गम नही ,उफ़् तक न करूँगा ।।
मैं खुद ही जल जाऊँगा वो दिन दूर नही ।। 

गुनाह किसी का भी हो ऐ ख़ुदा तू ही फैसला कर ।।
मैं तो बेबस हूँ पर तू तो इतना मज़बूर नही ।।
  
परवाह नही, तू मांग ले जिंदगी भी मुस्करा के ।।
अपने वादे से मुकर जाऊ ,ये मेरा दस्तूर नही ।।

                            .......R.K.M
         

रविवार, 16 अगस्त 2015

।।शेर।।तेरे इंतजार में।।

          ।।शेर।। तेरे इंतजार में।।

हम जानते है की हमे याद करते हो तुम ।।
पर मुझे यकीन खुद पर भी तो नही है।।

खुद से सम्हल कर रहना ये दोस्त यहाँ।।
लोग कहते है तखलीफो की कोई तारीख़ नहीँ होती ।।

फासले भहुत है कोशिस तो करो नजदीक आने की ।।
कही उम्र ही न गुज़र जाये तेरे इंतजार में ।।

इतने करीब भी मत आ जाना मेरे दोस्त तुम ।।
कि दूर जाने पर तेरा वजूद ही खत्म हो जाये ।।

ये दुनिया रंगीन लगती है तो ये वहम है तेरा ।।
खूबसूरत चेहरे वाले दिल के सच्चे नही होते ।। 

 
                             .......R.K.M

गुरुवार, 13 अगस्त 2015

।।ग़ज़ल।।सवाल मेरे गम पर।।

     ।।ग़ज़ल।।सवाल मेरे गम पर।।


आज फिर से हुआ था बवाल मेरे गम पर ।।
उनकी आँखों ने किया था सवाल मेरे गम पर ।।

उन्हें देखकर, भर ही आयी मेरी आँखे दोस्त !!
असर उनका तो पड़ा था, हरहाल मेरे गम पर ।। 

यकीं कर ,न कर, उनकी आँखे तो गवाह है ।।
जो आज, गयीं है कीचड़ उछाल मेरे गम पर ।। 

करता तो था तेरा इंतज़ार ,परछाईया सिमटने तक ।।
तेरी आहट भी कर गयी आज मलाल मेरे गम पर ।।

सच तो ये है कि तेरा वादा ही निभा रहा हूँ मैं ।।
जबकि तू चल रही है कोई चाल मेरे गम पर ।।

                             .......R.K.M

बुधवार, 12 अगस्त 2015

।।ग़ज़ल।।तेरे दिल के हालात नही ।।

  ।।ग़ज़ल।।तेरे दिल के हालात नही ।।


तू तो कहती है, पर यें तेरे दिल के हालात नही ।।
भरोसा मुझ पर रख या ख़ुदा पर कोई बात नही ।।

हद तो हो ही गयी है तेरे इंतजार की,ऐ बेख़बर ।।
या तो मासूम है तेरा दिल, या तेरी औकात नही ।।

ऐ दोस्त ये जिंदगी है, नशीहतो पर नही चलती ।।
हक़ीक़त चाहिये इसे, तेरे बदलते जज्बात नही ।। 

ऐ प्यार का ही असर है तू भरोसा कर, न कर ।।
ये निखरता चेहरा, कोई रब की सौगात नही ।।

जा भींग जायेगी तू, कमशिन अदाऒ की शहज़ादी ।।
अभी हुई है चाहत में अश्को की बरसात नही ।।

                            ......R.K.M

मंगलवार, 11 अगस्त 2015

।।ग़ज़ल।।उन्हें मोती नजर आया ।।

।।ग़ज़ल।।उन्हें मोती नज़र आया।।


बिना शिक़वे शिकायत के पहुँच उनके शहर आया ।।
लगी थी इश्क की बाजी चला उनके भी घर आया ।।

निकल कर सामने आये बिना परदे के महफ़िल में ।।
भरी महफ़िल दिवानो से दीवानापन उभर आया ।।

लगी बोली वहा पर थी मुहब्बत में गुनाहो की ।।
जिन्होंने बेवफ़ाई की उन्हें ही बेख़बर पाया ।।

उन्हें था फ़ैसला करना जिन्होंने रब से मांगा था ।।
मुझे ,मेरी मुहब्बत को , मेरा तो गम बिखर आया ।।

नहाकर हम निकल आये खुदी के गम के झरने से ।।
लगे थे अश्क चेहरे पर उन्हें मोती नजर आया ।।

                            .......R.K.M

सोमवार, 10 अगस्त 2015

।।ग़ज़ल।।यादें शिहर जायेगी।।

  ।।ग़ज़ल।।यांदे शिहर जायेगी।।


शाम धुँधली, हम उदास, रौनक बिखर जायेगी ।।
इन आँखों में तेरे प्यार की हर बूँद उभर जायेगी ।।

ऐ दोस्त अब कभी भी लौटकर मत आना तुम ।।
वरना तड़प तड़प कर मेरी जान निकर जायेगी ।।

आये ही क्यों गम भरी जिंदगी में दखल देने तुम ।।
अब पलको पर तेरी सूरत की लक़ीरें ठहर जायेगी ।।

आखिर चले ही गये मुझे तन्हा तन्हा करके ।।
तेरी बेहिसाब ख्वाबो में यादें शिहर जायेगी ।।

जा तेरी यादें इतनी कम भी नही कि भूल जाऊ तुमको ।।
मेरे गमो में भी तू मुस्कराती नजर आयेगी ।।

                             .....R.K.M

।।ग़ज़ल।।इरादा अब नही होता।।

  ।।ग़ज़ल।।इरादा अब नही होता ।।


सही है प्यार में गम से जादा कुछ नही होता ।।
मुद्दत अब नही होती इरादा अब नही होता ।।

मिले थे आप जैसे ही हजारो दोस्त पहले भी ।।
बिछड़ कर भूल जाते है वादा अब नही होता ।।

बड़ी तखलीफ़ होती है मिलकर भूल जाने से ।।
करु मैं लाख कोसिस गम आधा अब नही होता ।।

बड़ा बेबाक था मैं भी सजी थी दोस्त की महफ़िल ।।
ठहर कर सोच लेता हूँ आमादा अब नही होता ।।

सुनो ऐ दोस्त तुम मेरे सौदे हो रहे दिल के ।।
ठहर कर सोच लेना दिल नादाँ अब नही होता ।।

                           .....R.K.M

।।ग़ज़ल।।कहावत ही बदल डाली।।

  ।।ग़ज़ल।।कहावत ही बदल डाली।।


हमारे प्यार में दिल की मिलावट ही बदल डाली ।।
बड़ा मासूम था चेहरा दिखावट ही बदल डाली ।।

पिघल जाते है पथ्थर भी किसी का प्यार पाकर के ।।
गज़ब हो यार तुमने तो कहावत ही बदल डाली ।।

लिखा तकदीर में रब ने तुम्ही से प्यार करना था ।।
रब को दे गये चकमा लिखावट ही बदल डाली ।।

सजे थे प्यार के नगमे सजीं थीं आँख में खुशिया ।।
बड़े खुदगर्ज़ निकले तुम सजावट ही बदल डाली ।।

बने थे रास्ते तुम तक पहुचने के हजारो ही ।।
न जाने क्या मिला तुमको बनावट ही बदल डाली ।।

                            ....... R.K.M

।।ग़ज़ल।।करीब से देखा तो है।।

  ।।गज़ल।।क़रीब से देखा तो है।।


आज तेरी आँखों में अज़ीब सा देखा तो है ।।
कभी न मिलने वाला नसीब सा देखा तो है।।

कोई बात नही मेरे हालात न समझे हो तुम ।।
मेरे दिल को तुमने गरीब सा देखा तो है ।।

लोग करते है बेवफाई दिल टूटने के बाद यहा ।।
किये न किये उस तरकीब से देखा तो है ।।

गज़ब के यार हो तुम भी मगर पथ्थर नही लगते ।।
तुम्हारी उन अदाओ को क़रीब से देखा तो है ।।

उत्तर पाया नही है अभी मेरा प्यार तेरी आँखों में ।।
तेरी चाहत को नजरो की जरीब से देखा तो है ।।
 

                              .......R.K.M

गुरुवार, 6 अगस्त 2015

।।गज़ल।।मंजिल ही भुला बैठे है ।।

तुम्हे चाहकर अपनी मुश्किल ही बढ़ा बैठे है ।।
रास्ते और है पर मंजिल ही भुला बैठे है ।।

मत सोच कि तेरी अदाओ की कोई मिसाल नही ।।
ये तो हम है कि आपसे दिल ही लगा बैठे है ।। 

बेताब और भी लोग है फ़ासले मिटाने के लिये ।।
दिल के करीब रखकर बोझिल ही बना बैठे है ।।

तुमसे मिलना इक इत्तिफ़ाक है कोई चाल नही ।।
जबकि तेरी चाहत में ही खुद को गवां बैठे है ।।

फिर भी मत सोच तुमसे प्यार नही करता मैं ।।
तेरे इंतजार में महफ़िल को सजा बैठे है ।।

                           .......  R.K.M

बुधवार, 5 अगस्त 2015

।।गज़ल।।मुझे मोहलत नही देती ।।

  ।।गज़ल।।मुझे मोहलत नही देती ।।


कौन कहता है कि तू झलक-ऐ-जन्नत नही देती ।।
पर ये दुनिया तुम्हे देखने की इजाजत नही देती ।।

कसम तो खायी थी मैंने कभी न दिल लगाने की ।।
तुझे न देखू तो आँखे मुझे राहत नही देती ।।

पलटकर देख लेते तो तुम्हारा क्या बिगड़ जाता ।।
तुम्हारी सबनमी पलके मुझे मोहलत नही देती ।।

तुमारी शान्त सी चितवन, तुम्हारी झील सी आँखे।।
करू मैं लाख कोशिक पर कोई हलचल नही देती ।।

तुम्हारे चाँद से चेहरे से, मेरा दिल धड़कता है ।।
नजर की सादगी इतनी कोई आहट नही देती ।।

करू मैं लाख कोशिस पर इरादा टूट जाता है ।।
नजर मैं भी चुराता न, तेरी चाहत नही देती ।।
                             .......R.K.M

सोमवार, 3 अगस्त 2015

।।ग़ज़ल।।बर्बाद नही करता हूँ।।

   ।।गज़ल।।बर्बाद नही करता हूँ।।


दर्द कितना भी हो दोस्त तुम्हे याद नही करता हूँ।।
यकीं कर तुमसे मिलने की फरियाद नही करता हूँ ।।

डर मुझे भी है दोस्त गम के उन थपेड़ो का ।।
तभी तो इन आंशुओं को बर्बाद नही करता हूँ ।।

कही टूट न जाये कहर तुम पर मेरी यादो का ।।
दिल को रोका हूँ तभी,आबाद नही करता हूँ ।।

फ़िक्र मत कर टूट भी जाऊ तो कोई गम नही ।।
बेवफाई मैं टूटने के बाद भी नही करता हूँ ।।

जा चली जा मेरी यादो के शाये से दूर कही ।।
मैं भी भुला दूँगा पर उन्माद नही करता हूँ ।।

                            .......R.K.M

रविवार, 2 अगस्त 2015

।।गजल।।तबाह हो जायेगा तू।।

   ।।ग़ज़ल।।तबाह हो जायेगा तू।।

जब किसी हशीना की निगाह हो जायेगा तू ।।
फ़िक्र मत कर ऐ दोस्त तबाह हो जायेगा तू ।।

इक अदा, इक हँसी, इक याद के बदले दोस्त।।
लम्हा लम्हा, तन्हा का आगाह हो जायेगा तू ।।

मांगकर लाओगे जन्नत की ख़ुशी उसके लिये ।।
मगर अपनी ही जिंदगी से बेपरवाह हो जायेगा तू ।।

माना की बदनामियों का खौफ़ न होगा तुमको ।।
और उनके दिलो का शहंशाह हो जायेगा तू ।।

यकीनन आयेगे तेरे हिस्से में ख़ुशी के दो पल ।।
पर गमो के हर पल का गवाह हो जायेगा तू ।।

                          .........R.K.M

शनिवार, 1 अगस्त 2015

।।ग़ज़ल।।चलो हम दोस्ती कर ले ।।

    ।।ग़ज़ल।।चलो हम दोस्ती कर ले।।


न हम है मोम के पथ्थर ,सहारा तो मिलेगा ही ।।
चलो हम दोस्ती कर ले किनारा तो मिलेगा ही ।।

न तुम मिलते, न बस पाता हमारे आँख में चेहरा ।।
हँसी के साथ दो पल गम, प्यारा तो मिलेगा ही।।

भले अंजान हो मुझसे दिलो से पूछ तुम लेना ।।
इज्जत, बेकसी, चाहत, सारा तो मिलेगा ही ।।

करेगी बेवफाई ये भरोसा उम्र का मत कर ।।
यहा हर शख़्स इस गम का मारा तो मिलेगा ही ।।

बड़ा आराम आयेगा कभी जब मुस्करा दोगे ।।
न रब खुद छीन सकता है हमारा तो मिलेगा ही ।।

                            ........R.K.M

नशा ए इश्क

ग़ज़ल   नशा ए इश्क अब छोड़ा न जाए ।  जमाने से मगर उलझा न जाए ।   बड़ी मासूम हैं उसकी अदाएं,   कि मुझसे और अब देखा न जाए ।   गरीबों ...