रविवार, 30 अक्टूबर 2016

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4-ओपन करे रेजिस्टर करे ।
5-ऐप की सेटिंग में true  balance को ऑन करे ।
तुरन्त पाये 10 के बजाय 20 का wallet पॉइंट
6- वॉलेट से अपने नंबर को रिचार्ज करे ।
7-share करे और अधिक रिचार्ज पाये ।
8-ऑफर लोड करें और भी रिचार्ज पाये ।
9-शेयर करे रिचार्ज पाये
10-1000x10=10000तक बैलेंस रखे । 
हैप्पी दीपावली ।।
11-tarrif की बैलिडीटी की जानकारी ।
12-नेट बैलेंस की जानकारी ।
13-प्रत्येक कॉल की कॉल ड्यूरेशन एवं sms के चार्ज की जानकारी । आदि ओनली for Android.users .

मंगलवार, 11 अक्टूबर 2016

ग़ज़ल।कोई मुफ़लिस नज़र आया।


सजी महफ़िल दिवानों से मग़र गर्दिश नजर आया । ।
कोई मुल्ज़िम नज़र आया कोई मुफ़लिस नजर आया ।।

तकल्लुफ़ इश्क़ के दरम्यां हरारत की हवा बरपी ।
ख़ुदी की चाह पर बेशक़ वहा बंदिश नजर आया ।। 

हवाला दे रहे थे सब मेरी ही बदसलूकी का ।।
मेरा वो शक़ जताना ही उन्हें साज़िस नजर आया ।।

खिले सब चाँद से चेहरे कि जुल्फें चमचमाती थी ।
दिलों में कमसिनी थी पर उन्हें नरगिश नजर आया ।।

निगाहें चुन रही तन्हा किसी चेहरे की रौनक़ को ।
यक़ीनन शौक़ ऐ जलवा जवां आतिश नजर आया ।।

साबित था जुनूने-गम मग़र ग़ुमराह था रकमिश ।
मनाही इश्क़ की करता वही मुंसिफ़ नज़र आया ।।

                          ©© राम केश मिश्र

मंगलवार, 4 अक्टूबर 2016

ग़ज़ल।साहिलों पर दुश्मनो को आजमाने पड़ गये।

वक़्त की बंदिश रही वादे निभाने पड़ गये ।
दोस्ती भी न मिली रिस्ते भुलाने पड़ गये ।।

थी जरा मुश्क़िल मग़र मैं फूँक कर चलता रहा । 
बेवज़ह ही हमदिलों के दिल दुखाने पड़ गये ।।

जिंदगी खुद में पहेली सी मुझे लगने लगी थी ।
आँसुओ से ज़ख्म सारे फ़िर नहाने पड़ गये ।।

एक अर्से से सिसकता जी रहा था आज तक ।
दर्द के वो गीत फिर से गुनगुनाने पड़ गये ।।

माँग सकता था नही मै खुद खुदा से मिन्नते पर ।
आपके जज़्बात में खुद को झुकाने पड़  गये ।।

तुम मिले तो क्या मिले जो ख़ुसी थी मिट गयी ।
दर्द बन सैलाब उमड़ा आँसू बहाने पड़ गये ।।

सुन जरा रकमिश तुम्हारी दोस्ती में क्या मिला ।
साहिलों पर दुश्मनों को आजमाने पड़ गये ।।  

                        ©©राम केश मिश्र 'रकमिश'

नशा ए इश्क

ग़ज़ल   नशा ए इश्क अब छोड़ा न जाए ।  जमाने से मगर उलझा न जाए ।   बड़ी मासूम हैं उसकी अदाएं,   कि मुझसे और अब देखा न जाए ।   गरीबों ...