शनिवार, 5 जुलाई 2014

वक्त और हिसाब


          गजल(वक्त और हिसाब)

वक्त भी कितना लाजवाब होता हैं .।।
किसी का दर्द तो किसी का ख्वाब होता हैं .। 


लाख गुनाहों से कर ले कोई पर्दा यहाँ ।।
इक न इक दिन वह बेनकाब होता ।।

अमन किसे मिलता हैं छीनकर गैरो की खुशियाँ ।।
जब अपने ही दिल से जबाब होता है ।।

तखलीफ़ तो होती ही है प्यार में ऐ दोस्त ।।  
मौसम तो हर वक्त लाजवाब होता हैं ।। 


फिक्र मतकर उनकी बेवफाई की ऐ दोस्त ।। 
वक्त आने पर पल पल का हिसाब होता हैं ।।

नशा ए इश्क

ग़ज़ल   नशा ए इश्क अब छोड़ा न जाए ।  जमाने से मगर उलझा न जाए ।   बड़ी मासूम हैं उसकी अदाएं,   कि मुझसे और अब देखा न जाए ।   गरीबों ...