बुधवार, 30 सितंबर 2015

।।ग़ज़ल।।गुनाह के ख़ातिर ।।

   ।।ग़ज़ल।।गुनाह के ख़ातिर।।


तेरी मुद्दत, तेरी इज्जत तेरी परवाह के ख़ातिर
तन्हा हूँ अकेला ,पर किसी हमराह के ख़ातिर ।। 

जा चली जा ,दूर हो जा, न लौट कर आना कभी ।।
खुदी को रोकना मुश्किल तुम्हारी आह के ख़ातिर ।।

ये इश्क़ का दरिया है काँटे यहा चुभते रहेगे ।।
तुम्हे बदनाम क्यों कर दू महज़ आगाह के ख़ातिर ।।

चलो मैं मान लेता हूँ तुम्हे मुझसे मुहब्बत है ।।
मग़र तुम कल भी आये थे किसी की चाह के ख़ातिर ।।

तोड़ आयी हो जिसका दिल उसी को तू मना ले जा ।।
नही हम तोड़ते दिल को किसी गुनाह के ख़ातिर ।।

बहुत ढूढ़ा यहा मैंने कोई बेदाग़ न निकला ।।
तभी तो आज तन्हा हूँ वफ़ा की राह के ख़ातिर ।।

                              R.K.M

मंगलवार, 29 सितंबर 2015

।।ग़ज़ल।।बता इसकी दवा क्या है।।

।।ग़ज़ल।।बता इसकी दवा क्या है ।।

मिले जो इश्क़ में ताने बता इसकी दवा क्या है ।।
लगे जब हम भुलाने तो बता इसकी दवा क्या है ।।

चलो मैं मान लेता हूँ कि तुमने भूल ही कर दी ।।
मग़र ये दिल न माने तो बता इसकी दवा क्या है ।।

तेरे नज़दीक आने को तरसती रह गयी आँखे ।।
लगे आंशू बहाने तो बता इसकी दवा क्या है ।। 

तुम्हारी जिन अदाओ को बनाया इश्क़ का दर्पण ।।
लगे वह दिल जलाने तो बता इसकी दवा क्या है ।। 

यहा कीमत नही होती भरोसा टूट जाने पर ।।
करे कोई बहाने तो बता इसकी दवा क्या है ।। 

                           R.K.M

सोमवार, 28 सितंबर 2015

।।ग़ज़ल।।तुम्हारी याद के सदमे।।

   ।।ग़ज़ल।।तुमारी याद के सदमे।।

पुराने जख़्म थे फिर भी सहे नाशाद के सदमे ।।
अभी तकलीफ़ देते है कई दिन बाद के सदमे ।।

ये आंशू है बहेंगे ही करू मैं लाख कोसिस पर ।।
गिरेंगे भूल जाउगा तुम्हारी याद के सदमे।। 

तुम्हे क्या तुम तो बच निकले किसी महफूज़ 'साहिल' पर ।।
मुझे झकझोर जाते है हुये बर्बाद के सदमे ।।

हरारत थी तुम्हे भी पर निकल दरिया से तुम भागे ।।
अकेले ही सहे थे हम तेरी फरियाद के सदमे ।।

उम्रभर आह भर भरके घरौंदा जो बनया था ।।
मिटा थी इश्क की मंजिल ढही बुनियाद के सदमे ।।

न पूंछो है बहुत अच्छा हमारे अश्क़ की कीमत ।।
सहता जा रहा इनकी बड़ी तादाद के सदमे ।। 

                             R.K.M

रविवार, 27 सितंबर 2015

।।ग़ज़ल।।मुझे प्यार का तजुर्बा था।।

।।ग़ज़ल।।मुझे प्यार का तजुर्बा था ।।

राह ऐ मुहब्बत से गया हार का तजुर्बा था ।।
तुझे तेरी अदा मुझे प्यार का तजुर्बा था ।।

लाख़ नाकामियो के बाद भी हौसले मिलते रहे ।।
रह गया तन्हा कि इंतजार का तजुर्बा था ।।

तू मिलती तो थी किसीे और के ख़ातिर ही सही ।।
मुझे मेरी आँखों को दीदार का तजुर्बा था ।।

अब तक तेरे आने की तारीख़ ने दस्तख़त न दी ।।
झूठा था तेरा वादा पर एतबार का तर्जुबा था ।।

रूबरू हुये भी तो आग लगा बैठे दिल में ।।
वर्षो बाद कर ही दिये इनकार का तजुर्बा था ।।

ऐ "साहिलो" पर छोड़ कर चले जाने वाले दोस्त ।।
मैं रह ही गया ख़िदमत में बेकार का तजुर्बा था ।।

   
                       .. R.K.M

शनिवार, 26 सितंबर 2015

।।ग़ज़ल।।इंसान नही मिलते है ।।

  ।।ग़ज़ल।।इंसान नही मिलते है।।


ये इश्क़ है दोस्त यहा पर ईमान नही मिलते है।।
इस इश्क की दुनिया में इंसान नही मिलते है।।

तोड़ देगे दिल हरहाल किसी 'साहिल' पर ।।
यहा दर्द के शिवा कुछ इनाम नही मिलते है ।। 

नाम तक मिट जाता वफ़ा की कोई बात नही ।।
राहे मुहब्बत पर कुछ निसान नही मिलते है ।।

अदाओ की कशिश की कोई परवाह नही होगी तब ।।
'साहिल' पर फ़िसले तो गुमान नही मिलते है ।।

हर शख़्स गम का मारा हर ओर गुमसुदा सब ।।
हर ओर बेखुदी है यहा हैरान नही मिलते है ।। 

इस इश्क़ की महफ़िल में हर तऱफ रंजोगम हैं ।।
यहा कारवाँ निकलता अंजान नही मिलते है ।।

                             ..R.K.M

शुक्रवार, 25 सितंबर 2015

।।ग़ज़ल।।तेरी आजमाइस पर खरा उतरूंगा।।

।।ग़ज़ल।।आजमाइस पर खरा उतरूंगा।।

मिल न सकी दर्दो से रहाइस पर खरा उतरूंगा ।।
तेरी चाहत' तेरे सपने' तेरी ख़्वाइस पर खरा उतरूंगा ।।

यक़ीन न हो तो जायज़ा ले ले मेरे दिल का ।।
मैं तेरे दिल की हर आजमाइस पर खरा उतरूंगा ।।

तुझे भी भुला दूँगा' तेरी ख़ुशी के लिये ऐ दोस्त ।।
कर के देख 'तेरी फरमाइस पर खरा उतरूंगा ।।

नसीब में होगा गम तो आयेगा तेरे हिस्से में भी ।।
मेरी मत करना कोई पैमाइस पर खरा उतरूंगा ।।

ये मेरे वादे है तेरी कोई तेरी झूठी सौगात नही ।।
मैं तेरे 'साहिल' की हर नुमाइस पर खरा उतरूंगा ।।

                        ..R.K.M

गुरुवार, 24 सितंबर 2015

।।ग़ज़ल।।दिल जलाना तो पड़ेगा ही।।

।।ग़ज़ल।।दिल जलाना तो पड़ेगा ही।।


रहा बरसो से ख़ाली दिल जलाना तो पड़ेगा ही ।।
अग़र शौक़ ऐ मुहब्बत तो बताना तो पड़ेगा ही ।।

तुम्हे है प्यार करना तो जरा फिर सोच लेना तुम ।।
यहा पर गम भरे तन्हे बिताना तो पड़ेगा ही ।।

अभी है वक्त रहने दो बड़ी ज़ालिम ये दुनिया है ।।
बनेंगे क़हक़हे हरपल भुलाना तो पड़ेगा ही ।

हमारी दोस्ती के पल यक़ीनन तुम भुला दोगे ।।
मग़र रश्मे मुहब्बत को निभाना तो पड़ेगा ही ।।

यहा के रहनुमा कातिल सितमगर बन ही जाते है ।।
अग़र है घाव गहरा तो दिखाना तो पड़ेगा ही ।। 

ईलाजे दर्द की ख़्वाहिश यहा पूरी न होती है ।।
न होंगे आँख में आँशू बहाना तो पड़ेगा ही ।।

लुटते देख ख़ुद को भी शिकायत कर न पाओगे ।।
दिलो में दर्द होगा पर मुस्कराना तो पड़ेगा ही ।। 

                      R.K.M

बुधवार, 23 सितंबर 2015

।।ग़ज़ल।।यहा सब गम के मारे है।।

  ।।ग़ज़ल।।यहा सब गम के मारे है।।

भरे है दर्द तन्हा से यहा जितने किनारे है ।।
यहा मुझको नही रहना यहा सब गम के मारे है ।।

बड़े दिन बाद आया था तुम्हारे साथ साहिल पर ।।
सहारा कौन देगा जब यहा सब बेसहारे है ।। 

चलो ऐ दोस्त चलकरके अलग महफ़िल सजाये हम ।।
मुनासिब अब नही रहना यहा तो बस बेचारे है ।।

मुहब्बत में तबाही का मुझे न शौक़ कोई है ।।
हमारी दोस्ती में ही सभी चन्दा सितारे है ।। 

अग़र है चाह तुमको तो किसी से प्यार कर देखो ।।
मुझे रुकना नही पल भर यही पर दर्द सारे है ।।

                             .. R.K.M

मंगलवार, 22 सितंबर 2015

।।हुआ बदनाम साहिल पर ।।

.।।ग़ज़ल।।हुआ बदनाम साहिल पर।।


दरिया से निकलकर मैं हुआ नाकाम साहिल पर ।।
महज़ तेरे प्यार के ख़ातिर हुआ बदनाम साहिल पर ।।

बड़े नायाब होते है तुम्हारे प्यार के तोहफ़े ।।
जिसे मिलता वही फिरता यहा गुमनाम साहिल पर ।।

यहा के रहबरों को भी न जाने क्या हुआ होगा ।।
जिसे देखो वही लेता तुम्हारा नाम साहिल पर ।।

यहा तन्हा की बस्ती में ग़ज़ब के गम उभरते है ।।
तुम्हारे रूप से मिलता बड़ा आराम साहिल पर ।।

तुम्हारी ही अदाओ से यहा रौनक उभरती है ।।
दरिया तक भटकते है सुबह से शाम साहिल पर ।।

मैं था ढूढ़ने आया यहा पर दर्द का मरहम ।।
हक़ीक़त से न वाक़िब था लगा इल्जाम साहिल पर ।।

कभी चर्चा जो होती तो हमारा नाम आता था ।।
बनाकर अज़नबी छोड़ा हुआ बेनाम साहिल पर ।।

रहने दो अभी तक तो पुराने गम ही काफ़ी है ।।
अग़र भटके चला लेंगे इसी से काम साहिल पर ।। 

                           R.K.M

रविवार, 20 सितंबर 2015

।।ग़ज़ल।।परिन्दे तक भी रोये है ।।



इरादा इश्क़ का था पर निखालिश गम ही पाये है ।।
लुटा दी जिंदगी जिन पर वही मुझको भुलाये है ।।

जहा फेका था खत मेरा वहा से मैं उठा लाया ।।
फ़टे काग़ज़ के टुकड़ो को अभी तक हम संजोये है ।।

तरीके और भी थे दोस्त तेरे इनकार करने के ।।
काँटे क्यों बने दिल के फूल मैंने जो बोये थे ।।

कल तक भूल जाने की कोशिश की थी मैंने भी ।।
मग़र यादों से फ़ुर्सत ही शायद हम न पाये है ।।

अगर फुर्सत तुम्हे हो तो यकीं मानो चले आओ ।।
तुम्हारी याद में कल से परिंदे तक भी रोये है ।।

चले जाना न रोकूँगा दिखाकर रूप अपना तुम ।।
गज़ब की नींद आयेगी रातो भर न सोये है ।। 

तनिक भी फ़िक्र मत करना मेरे हालात पर तुम भी  ।।
बड़ा आराम मिलता है तभी पलके भिगोये है ।।

                          .. R.K.M

।।ग़ज़ल।।तुम्हे परहेज़ इतना था।।

  ।।ग़ज़ल।।तुम्हे परहेज़ इतना था ।।

बरसो तक तो तेरी चाहत का क्रेज इतना था ।।
तू ही तू थी तेरी अदाओ का पेज़ इतना था।।

ऐ दोस्त अब आये ही क्यों हो मनाने के लिये ।।
जब मेरी आदतो से तुम्हे परहेज़ इतना था ।। 

अश्क तो बहना ही था उस बेहिसाब मुहब्बत में ।।
जब हँसी थी तो मुझसे क्यों गुरेज़ इतना था ।।

ये दिल है तेरी बदलती अदाओ का कोई रुख नही ।।
क्या हो गया तेरे गुरूर का दहेज़ इतना था ।।

आज क्यों हो गया है उदास ये गुलाब सा चेहरा ।।
अभी कल तक तो बेसुमार तेज इतना था ।। ।।

जा अब लौट जा ऐ सितमगर ऐ संगदिल ।।
लिया चाहतो को मैंने भी सहेज इतना था ।।

                            ...R.K.M

शनिवार, 19 सितंबर 2015

।।ग़ज़ल।।सितमगर मैं दिखाता हूँ।।

   ।।ग़ज़ल।।सितमगर मैं दिखाता हूँ।।

चलो वीरान बस्ती के सभी घर मैं दिखाता हूँ ।।
रुको तुम साथ शाहिल पर समुन्दर मैं दिखाता हूँ ।।

यहा हैं गम के मारे वे जिन्हें सब कुछ मुअन्सर था ।।
लगा इनके दिलो में जो खंजर मैं दिखाता हूँ ।। 

जिनके हाथ है मलहम उन्हें भी घाव है गहरा ।।
छिपी मुस्कान में देखो सितमगर मैं दिखाता हूँ ।।

न राहे है ,न वादे है ,न कोई फर्ज का कायल ।।
न कोई नाम है दिल का वो बंजर मैं दिखाता हूँ ।।

यहा पर लूटने-लुटने की हसरत अब नही होती ।।
तड़पते गम की आहो का मंजर मैं दिखाता हूँ ।।

बड़ी मुद्दत से ही हमदम यहा से बच निकल पाया ।।
यही हालात हैं दिल के अक्सर मैं बताता हूँ ।।

                          R.K.M

शुक्रवार, 18 सितंबर 2015

।।ग़ज़ल।।दिल को जलाने के लिये।।

��।।ग़ज़ल।।इस दिल को जलाने के लिये ।।��

����
भरोसा तो चाहिये दोस्त मुहब्बत निभाने के लिये ।।
दिल पर पथ्थर भी रख लेंगे आजमाने के लिये ।।
����
सिर्फ नज़रो के इशारों की हम तवज्जो नही करते ।।
कोई भी मिल जायेगा यहा मुस्कराने के लिये ।।
����
हर बार की तरह तुम भी कुरेद जावोगे मेरे दिल को ।।
तब गम भी नही बच पायेगा गवाने के लिये ।। 
����
मेरे दिल टूटने के किस्से इतने हमआम हो गये है कि
अब महफिले भी नही मिलती दर्द छुपाने के लिये ।। 
����
हर बार धोखा ही पाया है अदाओ पर इल्म करके ।।
अदायें तो होती ही है बस दिखाने के लिये ।।
����
गर्दिशों के दौर से गुजर आया हूँ ये मेरे दोस्त ।।
बेवज़ह वक्त बर्बाद न कर मुझे लुभाने के लिये ।।
����
अब इन आँखों में प्यार की तस्वीरें नही बनती है ।।
तुम होगी कोई हशीना इस जमाने के लिये ।। 
����
जा कल पूछ कर आना अपने दिल से तन्हाइयो में ।।
वरना आना ही मत इस दिल को जलाने के लिये ।।

           ✏✏✏.R.K.M

बुधवार, 16 सितंबर 2015

।।ग़ज़ल।।दिल मज़बूर हो गया है।।

  ।।ग़ज़ल।।दिल मजबूर हो गया है ।।

हर चेहरा किसी के प्यार में नूर हो गया है ।।
इसी वज़ह से हर किसी को ग़ुरूर हो गया है ।।

ऐतराज मुझे भी नही है किसी की नज़ाक़त पर।।
पर मेरा भी दिल इसमें नासूर हो गया है ।।

भला मिलता ही क्या होगा किसी को बेवफाई से ।।
दिलो में दर्द सहकर भी खुदी से दूर हो गया है ।।

मिले थे कल तो वे बोले तुहारी याद आती है ।।
मग़र हालात के चलते ये दिल मजबूर हो गया है ।।

मुझे मालूम था सब कुछ  फिर भी मैं चला आया ।।
मुझसे दूर रहना अब उन्हें मंजूर हो गया है ।। 

गज़ब है यार ये दुनियां भरोसा अब नही होता ।।
भरोसा तोड़ देना अब यहा दरतूर हो गया है ।।

                          ....  R.K.M

शुक्रवार, 11 सितंबर 2015

।।ग़ज़ल।।प्यार की इस नाव पर।।

   ।।ग़ज़ल।।प्यार की इस नाव पर।।

तू रहे खुश ,लुट रहा मैं ,आज तेरे नाँव पर ।।
दिल बिछाकर रो रहा हूँ गिर रहे इस भाव पर ।।

क्या पता इस कत्ल के बाद जिन्दा रह सकू मैं ।।
डगमगाता चल रहा हूँ प्यार की इस नाव पर ।।

मिल रहे थे हौसले जब तुम्हारा साथ था ।
अब नही मलहम लगाता है कोई इस घाव पर ।।

जा समझ में आ गया, यह रहम था प्यार न था ।।
पर कोई कांटा नही था गड़ रहा जो पाँव पर ।।

इस तरह फेंका है तुमने शाहिलो से दूर मुझको ।।
अब कभी न आ सकूगा राहे सकूँ की छाँव पर।।

देख तेरी रहनुमाई प्यार मैं करने लगा था   ।।
थी चार दिन की जिंदगी वो भी लगा दी दाँव पर ।।

    
                      .... R.K.M

गुरुवार, 10 सितंबर 2015

।।ग़ज़ल।।सितमगर नही देखा ।।

  ।।ग़ज़ल।।सितमगर नही देखा।।

जिसने इश्क़ में बर्बादियो का मंज़र नही देखा ।।
मेरा दावा है ,शाहिलो पर समन्दर नही देखा ।।

कभी डूबकर बच निकला हो तो कोई बात नही ।।
दिलो में प्यार की कमियो का बंजर नही देखा ।।

बच ही नही पता कोई भी रास्ता गर्दिस में ।।
मंजिले लाख पायीं हो पर खुद का घर नही देखा ।।

बचेगा खाक दामन में ,नही तो प्यार कर देखो ।। 
किसी ने गम से बढ़कर कोई खंजर नही देखा ।। 

मग़र ऐ ! दोस्त होती है अमानत प्यार ही दिल की ।।
डरे है जो नफासत से ,मुकद्दर नही देखा ।।

तन्हा है ,उदासी है ,खमोसी में है रंजोगम ।।
खुदी के दिल से बड़कर के सितमगर नही देखा ।।

                          .....  R.K.M

बुधवार, 9 सितंबर 2015

।।ग़ज़ल।।यादो को मिटाने वाले ।।

   ।।ग़ज़ल।।यादो को मिटाने वाले।।

नज़र भर भी नही देखा नज़रो को चुराने वाले ।।
आज फिर आये थे मेरी यादो को मिटाने वाले ।।

बड़ी उम्मीद मुझको थी उनके मुस्कराने की।। 
नाउम्मीद कर गये हर पल के मुस्कराने वाले ।।

ख़ुदा से भी बढ़कर एतबार किया करता था।।
हर वफ़ा भूल गये मुझको रुलाने वाले ।। 

बड़ा सकून मिलता उनके नजर भर उठाने से ।।
मेरी सूरत ही मिटा बैठे फ़सलों को मिटाने वाले ।। 

अब नजऱ न आया नज़रो की काशिस उनको ।।
जिसको ढूढ़ते रहते तस्वीर बनाने वाले ।। 

ये ख़ुदा कभी भी उनका चेहरा नजर न आये ।।
मुझे भूल ही जाये अब मुझको मनाने वाले ।।   

                            .. R.K.M

मंगलवार, 8 सितंबर 2015

।।ग़ज़ल।।बर्बाद हुआ दिल ये।।

    ।।ग़ज़ल।।बर्बाद हुआ दिल ये।।



मत सोच तेरे इश्क़ में ,बर्बाद हुआ दिल ये ।।
तन्हाइयो में ,गम में ,नासाद हुआ दिल ये ।।

लगे है जख़्म सच है ,रुस्वाइयो के मारे ।।
मगर तेरी यादों से आबाद हुआ दिल ये ।।

बहे जो आंशू मेरे वो पानी तो नही थे ।।
तेरे चेहरे की झलक से ,आबाद हुआ दिल ये ।।

मैं रब से माग लूगा, खुशिओं की दुआ तेरी ।।
तेरी ही बद्दुआ का फरियाद हुआ दिल ये ।।

अब सीख गया मैं भी दर्दो को सहन करना ।।
वाक़िब ऐ हक़ीक़त वर्षो बाद हुआ दिल ये ।।

                       ....... R.K.M

रविवार, 6 सितंबर 2015

।।ग़ज़ल।।तू न समझे तो कोई बात नही ।।

।।ग़ज़ल।।तू न समझे तो कोई बात नही ।।


रोज मिलते है ,तू न समझे तो कोई बात नही ।।
इससे बेहतर ,कोई दुनिया में मुलाकात नही ।। 

तेरी आँखों को, आँखे ये देख लेती है ,बस ।।
इससे बढ़कर इश्क़ की कोई बरसात नही ।। 

तर बतर हो गया मैं तेरे मिलने से पहले ही ।।
ये दिल की हक़ीक़त है सिर्फ मेरे जज़्बात नही ।।

ये खुदा तेरे मिलने की मुराद ही पूरी न हो ।।
अभी मिलकर बिछड़ जाने के हालात नही ।।

सुना है इश्क़ में शाहिलो पर बिछड़ जाते है लोग ।।
तुम बिछड़कर मुस्कुराना और कोई सौगात नही ।।

                          ........R.K.M

।।ग़ज़ल।।मेरे प्यार का मुक़दमा था।।

  ।।ग़ज़ल।।मेरे प्यार का मुक़दमा था।।



तेरी ज़मानत ,मैं गुनेहगार, का मुक़दमा था ।।
मेरे रंजोगम से तेरे प्यार का मुकदमा था ।।

पैरवी कर आँखों ने क्या हाल बना रखा है ।।
किसके थे अश्क़ वो ,अधिकार का मुक़दमा था।।

हर बार मेरी पैमाइशे नाक़ाम होती ही रही ।।
अदालत तो तेरी ही थी ,बेकार का मुक़दमा था ।।

तारीख़ दर तारीख़ बदलती रही तेरे प्यार की ।।
तेरी आजमाइस ,मेरे एतबार का मुकदमा था ।।

आँखों ही आँखों से हर बार ज़िरह होती रही ।।
मेरी ख़्वाहिशे तेरी शौक़ में गयीं हार, का मुक़दमा था ।।

मुझे क्या मालुम ,फ़ैसले इश्क़ में होते नही ।।
मैं उनके कशिश का हो गया शिकार ,का मुक़दमा था।।

                          ......R.K.M

शनिवार, 5 सितंबर 2015

।।ग़ज़ल।।तन्हाइयां उन्हे रहती है।।

  ।।ग़ज़ल।।तन्हाइयां उन्हें रहती है।।



सुना है मेरे नाम पर रूसवाइयां उन्हें रहती है ।।
आजकल इश्क़ में तन्हाइयां उन्हें रहती है ।।

ताउम्र गुजार दी मैंने जिनके ही इंतजार में ।।
अब मेरे ही दीदार की दुश्वारियां उन्हें रहती है ।।

पास थे तो खुद की ही अदाओ में मशगूल रहे ।।
दूर है तो प्यार की वफ़ाइया उन्हें रहती है ।।

कल मुझसे ही पूछ बैठे अपने नाम का मतलब ।।
झूठ कह दिया यादों की कमजोरियां मुझे रहती हैं।।

तमाम वज़ह होती है किसी को भूल जाने की ।।
वरना याद तो हर किसी की परछाइयां मुझे रहती है ।।


                   ........ R.K.M

शुक्रवार, 4 सितंबर 2015

।।ग़ज़ल।।सज़ा तुमको मिलेगी ही ।।

  ।।ग़ज़ल।।सज़ा तुमको मिलेगी ही।।


निगाहे मत चुरा ,बेशक निगाहें तो पड़ेंगी ही ।।
निगाहें आइना दिल की, हक़ीक़त तो कहेगी ही ।।

नही समझे ,तो मत समझो हमारी चाह को चाहत ।।
सजेगी गम की महफ़िल तो सजा तुमको मिलेगी ही ।।

भले तुमने समझ रखा मेरे अश्क़ों को पानी सा ।।
अगर बरसेंगे ये आंशू ,कली दिल की खिलेगी ही ।।

हमारी ही वज़ह से तुम जरा सा मुस्कुरा पाये ।।
जरा तुम दूर हो देखो कमी मेरी खलेगी ही ।।

गुरुं मतकर अदाओं पर ,तमाशा चार दिन का है ।।
कोई मुड़कर न देखेगा उम्र तेरी ढलेगी ही  ।।

                           .....R.K.M

गुरुवार, 3 सितंबर 2015

।।ग़ज़ल।।धोखा खा रहा हूँ मैं।।

    ।।ग़ज़ल।।धोखा खा रहा हूँ मैं।।


गज़ब की आह है तेरी कि भरता जा रहा हूँ मैं ।।
तुम्हारी इक अदा भर से मरता जा रहा हूँ मैं ।।

न मिलती तू ,न जलता मैं तड़पकर, गम की गर्दिश में ।।
लगी है आग तन मन में ,जलता जा रहा हू मैं ।।

न जाने क्या मिला मुझको तुम्हारी आँख में ,हमदम ।।
अँधेरा छा रहा मन में ,बढ़ता जा रहा हूँ मैं ।।

तुम्हे ही देख पाता हूँ यहाँ ,दिल के उजाले में ।। 
नही है रास्ता कोई पर चलता जा रहा हूँ मैं ।।

नही मालूम है मुझको न कोशिस की कभी मैंने ।।
मंजिल पा रहा हूँ मैं कि धोखा खा रहा हूँ मैं ।।

अभी सुरुआत होगी पर सफाई मैं नही दूँगा ।।
तन्हा हूँ ,अकेला ,पर सकूँ तो पा रहा हूँ मैं ।।

                          ........R.K.M

बुधवार, 2 सितंबर 2015

।।गजल।।दर्द ये मंजूर है बेसक।।

   ।।ग़ज़ल।।दर्द ये मंजूर है बेसक ।।



इश्क में गम का आना, दस्तूर है बेसक ।।
हर कोई इस इश्क़ में, मजबूर है बेसक ।।

इश्क़ तो तन्हा की महफ़िल सजाता है ।।
हर किसी का दिल यहाँ बेकसूर है ,बेसक।

प्यार जिसका जितना ही परवान चढ़ता है ।।
उतना ही वह फासलो में दूर है बेसक ।।

इस इश्क़ में दिल के पैमाने नही होते है ।।
पर सभी को चाहतो का गुरूर है बेसक ।।

बस कुछ नही ये सिर्फ है गम इक दरिया ।।
पर हर किसी को दर्द ये मंजूर है बेसक ।।

                        ......R.K.M

मंगलवार, 1 सितंबर 2015

।।ग़ज़ल।।खुदी का दिल दुखाया हूँ।।

  ।।ग़ज़ल।।खुदी का दिल दुखाया हूँ ।।


मुझे है याद वो लम्हा अभी न भूल पाया हूँ।।
कभी आँखे ,कभी दिल को ,कभी खुद को रुलाया हूँ ।।

मुझे मालुम नही था कि छिपा है गम का वो मंजर ।।
तेरे चेहरे के दर्पण में तुझे न देख पाया हूँ ।।

तुम्हे तो याद ही होगा तेरी नजरो का अजमाना ।।
छुपा कर आह दिल की मैं हमेसा मुस्कुराया हूँ ।।

तनिक भाये थे दिल को तुम उठे ग़र्दिश के मौसम में ।।
मग़र मुझको पता क्या कि किनारो पर भुलाया हूँ ।।

न जाने आज क्यों मुझको बड़ी तकलीफ़ है होती ।।
भरोसा कर किसी पर मैं खुदी का दिल दुखाया हूँ ।।

यकीनन हमवफा तुमसे नही कोई शिकायत है ।।
खुदी के दिल का पागलपन नही मैं रोक पाया हूँ ।।

                         ........R.K.M

नशा ए इश्क

ग़ज़ल   नशा ए इश्क अब छोड़ा न जाए ।  जमाने से मगर उलझा न जाए ।   बड़ी मासूम हैं उसकी अदाएं,   कि मुझसे और अब देखा न जाए ।   गरीबों ...