मंगलवार, 8 सितंबर 2015

।।ग़ज़ल।।बर्बाद हुआ दिल ये।।

    ।।ग़ज़ल।।बर्बाद हुआ दिल ये।।



मत सोच तेरे इश्क़ में ,बर्बाद हुआ दिल ये ।।
तन्हाइयो में ,गम में ,नासाद हुआ दिल ये ।।

लगे है जख़्म सच है ,रुस्वाइयो के मारे ।।
मगर तेरी यादों से आबाद हुआ दिल ये ।।

बहे जो आंशू मेरे वो पानी तो नही थे ।।
तेरे चेहरे की झलक से ,आबाद हुआ दिल ये ।।

मैं रब से माग लूगा, खुशिओं की दुआ तेरी ।।
तेरी ही बद्दुआ का फरियाद हुआ दिल ये ।।

अब सीख गया मैं भी दर्दो को सहन करना ।।
वाक़िब ऐ हक़ीक़त वर्षो बाद हुआ दिल ये ।।

                       ....... R.K.M

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

नशा ए इश्क

ग़ज़ल   नशा ए इश्क अब छोड़ा न जाए ।  जमाने से मगर उलझा न जाए ।   बड़ी मासूम हैं उसकी अदाएं,   कि मुझसे और अब देखा न जाए ।   गरीबों ...