मंगलवार, 18 जुलाई 2017

सिर्फ मुझको सज़ा आपने क्यो दिया ।

गजल

दर्द दिल का बढ़ा आपने  क्यों  दिया ।
सिर्फ़ मुझको सज़ा आपने क्यों दिया ।।

आप भी हो  गुनेगार  मानो  यकीं ।
मेरी चाहत भुला आपने क्यों दिया ।

आरजू थी तेरी  दोसती  की  बहुत ।
दिल्लगी मे दग़ा आपने क्यों दिया ।।

राह भटका हुआ था  मुसाफ़िर  कोई ।
ग़म का मंज़र दिखा आपने क्यो दिया ।।

लफ़्ज के ज़ख़्म दिल मे समाते गये । 
आंसुओं को जला आपने क्यों दिया ।

मुद्दतो से मिली थी ख़ुसी की झलक ।
मुस्कराकर  रूला आपने क्यों दिया ।।

फ़ाशलो के तऱीके थे रकमिश बहुत ।
मर्ज़ देकर दवा  आपने  क्यो  दिया ।। 

                      राम केश मिश्र

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