शुक्रवार, 31 जुलाई 2015

।।गजल।।गुलाब तेरे घर का।।

     ।।गजल।।गुलाब तेरे घर का ।।


रास्ता है कितना लाजबाब तेरे घर का ।।
मुझे पसन्द आया वो गुलाब तेरे घर का ।।

मेरे हाथो में मयस्कर न हुआ कोई गम नही ।।
नजर में तो आया वो ख्वाब तेरे घर का ।।

तुम न बुलावो तो भी चला आउगा मैं ।।
मैं हो गया हूँ इतना बेताब तेरे घर का ।।

तेरी ही गलियोँ में तू नजर आयी थी मुझे ।।
बाक़ी है अभी भी कुछ हिसाब तेरे घर का ।।

हर्ज क्या है मेरे आने पर पर्दा उठा देने से ।। 
मैं खुद बन गया हूँ इक आफ़ताब तेरे घर का ।।

                         ........  R.K.M

सोमवार, 27 जुलाई 2015

।।इंसान बनाना है।।

        ।।गज़ल।।इंसान बनाना हैं।। 


अब मंजिलो की राहे आसान बनाना है ।।
हर आदमी को फिर से इंसान बनाना है ।।

क्यूं दिल में थम गया है जज़्बा वो प्यार का ।।
हमदिली का दिल में तूफ़ान बनाना है ।।

न कोई तुमसे रूठे न दिल किसी का तोड़ो ।।
हर महफ़िलो में तुमको निसान बनाना है ।।

माना की सबको मिलती जन्नत नही यहा  पर ।।
उनको यही पर रहकर भगवान बनाना है ।। 

हर रिश्ता है प्यारा रिस्तो की क़द्र करिये ।।
इस जिंदगी में दोस्ती आसान बनाना है ।।

                       .........R.K.M

शुक्रवार, 24 जुलाई 2015

।।ग़ज़ल।।तेरे इनकार से पहले।।

   ।।गजल।।तेरे इनकार से पहले ।।


मायूसी मत दिखावो तुम सुरु दीदार से पहले ।।
भरोसा मैं दिलाऊँगा तेरे इनकार से पहले ।।

कोशिस मैं करूँगा की न निकले आँख से आंशू ।।
अपना दिल बिछा दूँगा किसी बौछार से पहले ।।

बहुत है शौक देखूँ मैं तुम्हारा रात दिन चेहरा ।।
निकल जायेगी जां मेरी तेरे इनकार से पहले ।।

फ़िक्र मत कर कभी भी न तेरा दिल दुखाउगा ।।
न कोई कश्म अब होगी तेरे इज़हार से पहले ।।

अगर मौका मिलेगा तो रब से माग मैं लूँगा ।।
तुम्हे, तेरी मुहब्बत को, किसी भी हार से पहले ।।

                        .........R.K.M

गुरुवार, 23 जुलाई 2015

।।गजल।।आदत न होती थी।।

   ।।गजल।।आदत न होती थी ।।

वजह कुछ भी रही हो पर कोई आहट न होती थी ।।
कोई गम भी नही था तब कही हुज्जत न होती थी ।।

न मंजिल थी न वादा था न तेरी रहनुमाई थी ।।
अकेला था अकेले में कोई दिक्कत न होती थी ।।

मिले हो तुम हमे जब से नजारे खुद अचंभित है ।।
किसी को देखते रहना मेरी आदत न होती थी ।।  

मग़र हैरान हूँ कल से तुम्हारी इक झलक पाकर ।।
किसी के पास आने की कभी हसरत न होती थी ।। 

करूगा मैं इशारा तो न तुम मौन हो जाना ।।
किसी के दिल दुखाने की कभी चाहत न होती थी ।।

                         .........R.K.M

बुधवार, 22 जुलाई 2015

।।गजल।।कुछ तो बहाना चाहिए।।

   ।।गज़ल।।कुछ तो बहाना चाहिए ।।

हद हो गयी अब तो तुम्हे मुस्कुराना चाहिए ।।
ऐ दोस्त तेरे दीदार का कुछ तो बहाना चाहिए ।।

कल परसो से इसारा कर रहा हूँ मैं तुम्हे ।।
अब तेरी भी अदा कुछ खास होनी चाहिएे ।।

मत झुका अपनी नजर तू नजर भर देखने दे ।।
उस नजर को इस नजर के पास आना चाहिए ।। 

हो गया मुझको यकी न कभी तू न कहेगी ।।
हा कहने में तुम्हे भी उफ़ न कहना चाहिए ।।

आ हमारी आँख का बन जा कोई नमकीन मरहम ।।
है यकीं तुम पर तुम्हे अब मान जाना चाहिए ।। 

                     ..........R.K.M

सोमवार, 20 जुलाई 2015

।।ग़ज़ल।।तुझको भुलाने के लिये।।

    ।।गज़ल।।तुझको भुलाने के लिये।।


वफ़ा तो चाहिये ही सक को मिटाने के लिये ।।
वक्त भी आयेगा  दोस्त वादा निभाने के लिये ।।

जा चली जा मेरी नजर से दूर हो जा अब ।।
फिर कभी भी न आना अश्क बहाने के लिये ।।

न जाने कितने आंशू गिर गये तेरी यादो में ।। 
पर शायद वो भी कम थे तुझको भुलाने के लिये ।।

सज़ा क्यों मिली है मुझे मेरी बेगुनाही की ।।
क्या क्या लुटा बैठा हूँ तुमको मनाने के लिये ।।

जा मुझसे दूर हो जा मेरी याद मत करना कभी ।
बहुत है लोग यहाँ तेरे दिल को आजमाने के लिये ।।।

तुम आये तेरा सुक्रिया पर दिल टूट जाने के बाद ।।
भरोसा तो चाहिए ही दिल को लगाने के लिये ।।

                              ........R.K.M

गुरुवार, 16 जुलाई 2015

।।गज़ल।।तेरी इज्जत नही होती।।

  ।।गजल।।तेरी इज्जत नही होती ।।

ऐ दोस्त तू मेरे प्यार की जन्नत नही होती ।।
तो सच है इस दिल में तेरी इज्जत नही होती ।।

लोग करते है दुआ, रब से ख्वाहिशो के लिये ।।
पर मेरे लिये तेरे शिवा कुछ मन्नत नही होती ।।

तू खुशनुमा न होती,तू हमवफा न होती ।।
तो तुम्हे देखने की लत इल्लत नही होती ।।

जब जब मिले है तुमसे ,बस मुस्कराया तुमने ।।
वरना इस तरह बेबस मेरी आदत नही होती ।। 

तू जिंदगी का शाहिल, खुद जिंदगी है मेरी ।।
अब तेरे शिवा कुछ भी हसरत नही होती ।।

                     ...........R.K.M

बुधवार, 15 जुलाई 2015

।।गज़ल।।उदास है मौसम।।

       ।।गज़ल।।उदास है मौसम ।।

कल परसो से बड़ा ही खास है मौसम ।।
पर तू नही तो तेरे बिन उदास है मौसम ।।

तेरी याद आती है तो बरसात हो जाती ।। सच है मेरे गम की तरह बिंदास है मौसम ।।

इल्म तुमको हो न हो यकी मुझको हो गया है ।।
तेरे प्यार का नया एहसास है मौसम ।।

गम और तन्हा की रौनक अब यहा छाने लगी ।।
अब मुझे हो गया बिस्वास है मौसम ।।

कि तू नही आयेगी मिलने शाम ढलने तक ।।
अब दिन ब दिन हो रहा बकवास है मौसम ।।

                     .............R.K.M

मंगलवार, 14 जुलाई 2015

।।गजल।।नसीब से ज्यादा।।

      ।।गज़ल।।नसीब से ज्यादा ।।

दर्द कौन सहता है गरीब से ज्यादा ।।
मिलता किसे क्या है नसीब से ज्यादा ।।

कद्र करता हूँ तुम्हारे प्यार की अब भी ।।
ख्याल तेरा है हमे हर चीज से ज्यादा ।।

जब दिन ने किसी और को एहसास कर लिया ।।
तो अब कोसिस न करो तरकीब से ज्यादा ।।

जब किस्मतों ने ही हमारा रिश्ता नही जोड़ा ।।
तब क्यों पेश आते हो तमीज से ज्यादा ।।

बेवफा मत कहना मेरी मजबूरिओ की खातिर ।।
मेरी दोस्ती है बढ़कर किसी ताबीज़ से ज्यादा ।।

                      .............R.K.M

।।ग़ज़ल।।तबाह करके।।

        ।।ग़ज़ल।।तबाह करके।।

मैं खुद का गुनेहगार था मुहब्बत की चाह करके ।।
फिर चले गये तुम मेरा शहर तबाह करके ।।

तू जन्नत न थी पर जन्नत से कम न थी ।।
आखिर चले ही गये इक गम का आगाह करके ।।

जुर्म तेरा ही था मगर सज़ा मुझको मिली है ।।
तुम छुप से गये हो सबको गवाह करके ।।

उम्र भर की तन्हाई का फैसला तेरा ही था ।।
रहना पड़ेगा मुझे लम्हा लम्हा निबाह करके ।।

क्या कर दिये ये मेरे दोस्त मेरी वफाओ का ।।
हर सज़ा मुझको दी खुद ही गुनाह करके ।।

                    .............   R.K.M

सोमवार, 13 जुलाई 2015

।।ग़ज़ल।।वादा निभाता तो हूँ आता तो हूँ।।

।।गज़ल।।वादा निभाता तो हूँ आता तो हूँ ।।

तेरी याद की महफ़िल सजाता तो हूँ आता तो हूँ ।।
तेरे जाने के बाद भी बुलाता तो हू आता तो हूँ ।।

तू चली गयी अपनी बदनामिओ के डर से खुद ।।
अब अकेले ही वो गम उठाता तो हूँ आता तो हू ।।

तू बेवफा नही है बस मेरी किस्मत का फैसला है ।।
खुद की तन्हाई छिपाता तो हूं आता तो हूँ ।।

बहाना तक न बचा अब उन गलियो में टहलने के लिये ।।
पर तेरे ही गीत गुनगुनाता तो हूँ आता तो हू ।।

आउगा ताउम्र तेरा इन्तजार करने तेरे घर के करीब ।।
आज भी तेरा वादा निभाता तो हू आता तो हूँ ।।

                  ...............  R.K.M

बुधवार, 8 जुलाई 2015

।।सुबह से भटके थे।।

      ।।गज़ल सुबह से भटके थे ।।

तेरे इंतजार में सुबह से भटके थे ।।
अनजाने प्यार में सुबह से भटके थे ।।

बेवफावो से भी मैंने रास्ता पूछा किया ।
जब तेरे दीदार में सुबह से भटके थे ।।

खबर खुद की नही थी यकीनन साम से पहले ।।
पर तेरे एतबार में सुबह से भटके थे ।।

अनजानी रहो पर मिले थे  मुस्कुराते वे ।।
मुझे लगा की बेकार में सुबह से भटके थे ।।
                  
बेवफाओ सी हँसी आ गयी उनको अचानक ।।
मैं रह गया मझधार में कि सुबह से भटके थे ।।

                  R.K.M

।।गज़ल।।डरता तो हूँ।।

            ।।गज़ल।।डरता तो हूँ ।।

तेरी यादो में तड़पा सम्हलता तो हूँ ।।
मैं मुहब्बत तुमसे करता तो हूँ ।।

रौनके थी यकीनन तेरे पास रहने से  ।।
बुझते हुये दिये सा अब जलता तो हूँ ।।

दूर कर दिया हैं तुमने तो क्या हुआ ।।
दूर रहकर भी आहें भरता तो हूँ ।।

यकीं कर, न कर,फर्क कुछ भी नही ।।
तेरी निगाहो से आज भी डरता तो हूँ ।।

तेरी खुशियो की क़द्र ही करके क्या करू मैं।।
हर पल तेरे गम में दोस्त मरता तो हूँ ।। 

कब तक सामना करूँ तेरी यादो का ।।
खुद की बेगुनाही की कीमत भरता तो हूँ।। 

                        ................R.K.M

नशा ए इश्क

ग़ज़ल   नशा ए इश्क अब छोड़ा न जाए ।  जमाने से मगर उलझा न जाए ।   बड़ी मासूम हैं उसकी अदाएं,   कि मुझसे और अब देखा न जाए ।   गरीबों ...