सोमवार, 20 जुलाई 2015

।।ग़ज़ल।।तुझको भुलाने के लिये।।

    ।।गज़ल।।तुझको भुलाने के लिये।।


वफ़ा तो चाहिये ही सक को मिटाने के लिये ।।
वक्त भी आयेगा  दोस्त वादा निभाने के लिये ।।

जा चली जा मेरी नजर से दूर हो जा अब ।।
फिर कभी भी न आना अश्क बहाने के लिये ।।

न जाने कितने आंशू गिर गये तेरी यादो में ।। 
पर शायद वो भी कम थे तुझको भुलाने के लिये ।।

सज़ा क्यों मिली है मुझे मेरी बेगुनाही की ।।
क्या क्या लुटा बैठा हूँ तुमको मनाने के लिये ।।

जा मुझसे दूर हो जा मेरी याद मत करना कभी ।
बहुत है लोग यहाँ तेरे दिल को आजमाने के लिये ।।।

तुम आये तेरा सुक्रिया पर दिल टूट जाने के बाद ।।
भरोसा तो चाहिए ही दिल को लगाने के लिये ।।

                              ........R.K.M

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