बुधवार, 8 जुलाई 2015

।।सुबह से भटके थे।।

      ।।गज़ल सुबह से भटके थे ।।

तेरे इंतजार में सुबह से भटके थे ।।
अनजाने प्यार में सुबह से भटके थे ।।

बेवफावो से भी मैंने रास्ता पूछा किया ।
जब तेरे दीदार में सुबह से भटके थे ।।

खबर खुद की नही थी यकीनन साम से पहले ।।
पर तेरे एतबार में सुबह से भटके थे ।।

अनजानी रहो पर मिले थे  मुस्कुराते वे ।।
मुझे लगा की बेकार में सुबह से भटके थे ।।
                  
बेवफाओ सी हँसी आ गयी उनको अचानक ।।
मैं रह गया मझधार में कि सुबह से भटके थे ।।

                  R.K.M

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