मंगलवार, 17 मार्च 2015

।।गजल।।।।आरजू ही बिखर गयी।।

    ।।गजल।।आरजू ही बिखर गयी ।।


हर चाहत की रौनक, हर आरजू बिखर गयी ।।
तेरे जाने से मेरी दुनिया ही उजड़ गयी ।।1।। 


पढ़ता तो हूँ तेरे खत की हर लाइनें हरदम ।।
तेरी तस्वीर पढ़ते पढ़ते से मेरी नज़रे सुधर गयी ।।2।।।


तू न समझे कोई बात नही तेरे ही कहर का मतलब ।।
पर इसके ही असर से मेरी हसरत ही बिखर गयी ।।3।।


आखिर इंतजार का भी वक्त होता है ऐ दोस्त ।।
न जाने तब से कितनी तन्हाई गुजर गयी ।।4।।


रोक तो लेता ही मैं अपने बेगुनाह आशुओ को ।।
पर तेरी तलाश में खुद व् खुद निकर गयी ।।5।।

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गुरुवार, 12 मार्च 2015

।।गजल।।बादशाह हूँ मैं।।

        ।।गजल।।बादशाह हूँ मैं ।।



तेरा दरिया तेरी मंजिल तेरी पनाह हूँ मैं ।।
तेरी वफ़ा तेरी अदा का  तलबगार हूँ मैं ।।

बिखर गया हूँ आकर तेरे आगोश के शाये में ।।
तेरी  इस बेबस कशिश का गवाह हूँ मै ।।2।।


तेरे ख्वाबो की मंजिल से लौट कर आया हूँ  ।। 
तेरा साथी तेरा हमदम तेरा आगाह हूँ मैं ।।3।।


तू कुछ भी नही है मेरी जन्नत के सिवा हमदिल ।।
तेरे लब्जो की सजा तेरी निगाह हूँ मै ।।4।। 


लोग तो जलते है मेरी इन वफाओ से दोस्त ।।
क्योंकि जानते है तेरे हुस्न का बादशाह हूँ मै।। 5।।

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।।गजल।।खुद को गवां बैठा हूँ।।

      ।।गजल।।खुद को गवां बैठा हूँ ।।




मैं कब से उनके चेहरे पर नजरें गड़ा बैठा हूँ ।।
वे तो खामोश है मैं खुद को भुला बैठा हूँ ।।1।।


यकीन उनको भी है उनकी रहनुमाई का ।।
मैं भी उनकी याद में पलके झुका बैठा हूँ।।2।।



शुक्रिया अदा करता हूँ उनकी हर मुस्कराहट का।।
उनके रुख्शत पर हर एक शै लुटा बैठा हूँ ।।3।।


शहम जाता हूँ उनके करीब से गुजरने पर ।।
मग़र दूरियों में उनकी ही तस्वीर छिपा बैठा हूँ ।।


कल ही उसने पूंछा कितनी मुहब्बत है तुमको ।।
कैसे कह दू उनकी अदाओ में खुद को गवां बैठा हूँ ।5।।

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बुधवार, 11 मार्च 2015

।।गजल।।खुदा ही गुनेहगार हो गया।।

  ।।गजल।।खुदा ही गुनेहगार हो गया।।


जब से उनकी चाहत पर एतबार हो गया  ।।
दिल न रहा हमदिल बेकार हो गया ।।1।।

उनका साया तक भी नसीब न हुआ तब से  ।।
जब मिले तो उम्र भर का इंतजार हो गया ।।2।।


लम्हा लम्हा मिलने की दुआ मांगी रब से ।।
तन्हा तन्हा उन्ही पर बेजार हो गया ।।3।।


शौक़ीन न था मैं इश्क की तन्हाइयो का दोस्त ।।
उनकी ही कमसिनी से तार तार हो गया ।।4।।


शिकायत न करूँगा तेरी तस्वीर से कभी भी ।।
क्या करू जब दिल ही गुनेहगार हो गया ।।5।।

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सोमवार, 9 मार्च 2015

।।गजल।।हरकत नही देखी जाती।।

    ।।गजल।।गम से निकाह न कर।।

प्यार कर पर प्यार मे जिंदगी तबाह न कर ।।
कम से कम हर किसी पर सक की निगाह न कर ।। 


और भी तो है मायने इस जिंदगी के  दोस्त ।।
सिर्फ प्यार के ही लिये हर गुनाह न कर ।।2।। 


प्यार में रास्तो की कोई शरहद नही होती ।।
जिंदगी भर शाहिलो पर ही निबाह न कर ।।3।।


और भी रिश्ते है तेरे ही इंतजार में माहिल ।।
मायूस न कर इनको, गम में पनाह न कर।।4।।


यकी कर तुम्हे भी  जरूरत है जिंदगी में इनकी ।।
अभी भी वक्त है गम से निकाह न कर ।।5।।

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।।गजल।।गम से निकाह न कर।।

    ।।गजल।।गम से निकाह न कर।।

प्यार कर पर प्यार मे जिंदगी तबाह न कर ।।
कम से कम हर किसी पर सक की निगाह न कर ।। 


और भी तो है मायने इस जिंदगी के  दोस्त ।।
सिर्फ प्यार के ही लिये हर गुनाह न कर ।।2।। 


प्यार में रास्तो की कोई शरहद नही होती ।।
जिंदगी भर शाहिलो पर ही निबाह न कर ।।3।।


और भी रिश्ते है तेरे ही इंतजार में माहिल ।।
मायूस न कर इनको, गम में पनाह न कर।।4।।


यकी कर तुम्हे भी  जरूरत है जिंदगी में इनकी ।।
अभी भी वक्त है गम से निकाह न कर ।।5।।

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शनिवार, 7 मार्च 2015

।।गजल।।प्यार की ख्याहिस न थी।।

    ।।गजल।।प्यार की ख्वाहिस न थी।।


ऐ दोस्त मुझे तेरे प्यार की ख्वाहिस न थी ।। 
ये तेरा ही कहर था मेरी आजमाइस न थी ।।1।। 


तब तुम तोड़कर दोस्ती भी चले गये मेरी ।।
जब तुमसे दूर रहने की भी गुंजाइस न थी ।।2।।


फर्क तो पड़ता ही है हालात बदल जाने से।।
पर तेरे बदल जाने की कोई फरमाइस न थी ।। 3।।


कल ही लौट कर चला आया तेरे शहर से मैं ।।
तेरी तस्वीर न थी अदाओ की नुमाइस न थी ।।4 ।।


बस दिल जीत लिया था तेरा रूठना मनाना ।।
वरना इस दिल की कोई पैमाइस न थी ।।5।।

   
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।।गजल।। कसूर तू।से है।।

     ।।गजल।। कसूर तुमसे है।।



मेरी हर वफा, मेरा हर गुरूर, तुमसे है ।।
कम ही पर जो भी है सुरूर तुमसे है ।। 1।।


माना कि मै आज भी गुनेहगार हू तेरा  ।।
अनजाने में जो भी हुआ कसूर तुमसे है।।2।।


किसी की बद्दुवाओ की तवज्जो न की मैंने।।
पर इस दिल की दुआ जरुर तुमसे है ।।3।।


तुमे न हो मालूम तो सुन ले बेअसर दिल ।।
तुम्हारी चाहत में दिल मजबूर तुमसे है ।।4।। 


अब इतना भी न कर की भरोसा भी टूट जाये ।।
फासले कुछ भी नही पर दूर तुमसे है ।।5।।

                    ***

नशा ए इश्क

ग़ज़ल   नशा ए इश्क अब छोड़ा न जाए ।  जमाने से मगर उलझा न जाए ।   बड़ी मासूम हैं उसकी अदाएं,   कि मुझसे और अब देखा न जाए ।   गरीबों ...