शनिवार, 7 मार्च 2015

।।गजल।।प्यार की ख्याहिस न थी।।

    ।।गजल।।प्यार की ख्वाहिस न थी।।


ऐ दोस्त मुझे तेरे प्यार की ख्वाहिस न थी ।। 
ये तेरा ही कहर था मेरी आजमाइस न थी ।।1।। 


तब तुम तोड़कर दोस्ती भी चले गये मेरी ।।
जब तुमसे दूर रहने की भी गुंजाइस न थी ।।2।।


फर्क तो पड़ता ही है हालात बदल जाने से।।
पर तेरे बदल जाने की कोई फरमाइस न थी ।। 3।।


कल ही लौट कर चला आया तेरे शहर से मैं ।।
तेरी तस्वीर न थी अदाओ की नुमाइस न थी ।।4 ।।


बस दिल जीत लिया था तेरा रूठना मनाना ।।
वरना इस दिल की कोई पैमाइस न थी ।।5।।

   
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