।।गजल।।आरजू ही बिखर गयी ।।
हर चाहत की रौनक, हर आरजू बिखर गयी ।।
तेरे जाने से मेरी दुनिया ही उजड़ गयी ।।1।।
पढ़ता तो हूँ तेरे खत की हर लाइनें हरदम ।।
तेरी तस्वीर पढ़ते पढ़ते से मेरी नज़रे सुधर गयी ।।2।।।
तू न समझे कोई बात नही तेरे ही कहर का मतलब ।।
पर इसके ही असर से मेरी हसरत ही बिखर गयी ।।3।।
आखिर इंतजार का भी वक्त होता है ऐ दोस्त ।।
न जाने तब से कितनी तन्हाई गुजर गयी ।।4।।
रोक तो लेता ही मैं अपने बेगुनाह आशुओ को ।।
पर तेरी तलाश में खुद व् खुद निकर गयी ।।5।।
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