गुरुवार, 26 मई 2016

गज़ल।बेवफ़ा इंसान अब होने लगा है ।

    गीतिका।बेवफ़ा इंसान अब होने लगा है ।

आदमी हर बात को ढोने लगा है ।
झूठ सच का फासला खोने लगा है ।।

प्यार के लायक नही जो प्यार में ।
दोस्ती से हाथ भी धोने लगा है ।।

फ़र्ज़ की सब बंदिशें खुद तोड़कर ।
बेवफ़ा इंसान अब होने लगा है ।।

क़द्र रिस्तो की न जिसने की कभी ।
है अकेला, आज वो रोने लगा है ।।

प्यार का दीपक जलाना भूलकर ।
नफ़रतों का जहर बोने लगा है ।।

वक्त से लड़ना है असली ज़िंदगी ।
जाग"रकमिश"तू कहाँ सोने लगा है ।

                           राम केश मिश्र(रकमिश)

बुधवार, 18 मई 2016

ग़ज़ल।मुहब्बत की दवा होकर।

         ग़ज़ल।मुहब्बत की दवा होकर।

बनी गम की निसानी जब तमन्ना वो वयाँ होकर ।
मिटा दी जिंदगी बेशक़ मुहब्बत मे रवाँ होकर ।

मिला मासूम जो चेहरा निगाहों की शरारत से ।
खिली हसरत बेक़ाबू बन अदाओ में जवां होकर ।

हवाओं में ,फिज़ाओ में ,निग़ाहों में ,अदाओं में ।
वो आती सामने मेरे मुहब्बत की दवा होकर ।

उठी ग़र्दिश में ज़ो रौनक सजाने के लिये दिल को ।
जलाने वो लगी मुझको ज़ख्मो पर लवा होकर । 

उठे जब क़हक़हे नफ़रत नज़ाक़त में नसीहत बन । 
पुरानी दर्द तन्हाई उभरती तब हया होकर ।

कि "रकमिश'आज तक तूने जलाया सिर्फ़ दिल मेरा ।
कभी तो हमनवां होकर कभी दर्द-ऐ-हवा होकर ।

                                ©राम केश मिश्र

शुक्रवार, 13 मई 2016

ग़ज़ल।जमानत तो मिलेगी ही ।

      ग़ज़ल।ज़मानत तो मिलेगी ही ।

रहोगे नेक दिल बेशक़ इमानत तो मिलेगी ही ।
करारा जख़्म होगा पर अमानत तो मिलेगी ही ।

ग़मे ग़र्दिश हकीक़त मे ख़ता तारीफ़ की ख़्वाहिश ।
वफ़ा की रहनुमाई में ज़लालत तो मिलेगी ही ।

बड़ी नायाब होती है अदाओं की गिरफ़्तारी ।
निग़ाहें बर्क़ रखो तुम शरारत तो मिलेगी ही ।

बहुत हो दूर मंजिल पर चले बेबाक़ तुम जाओ ।
लगेंगे ग़म भरे झोंके हरारत तो मिलेगी ही ।

शिकारी हो रहा देखो यहा हर शख़्स रंजिस में ।
साज़िश हो रही उसकी वकालत तो मिलेगी ही ।

अग़र है आदमी सच्चा अदालत क्या गवाही क्या ।
भले हो क़ैद दो इक दिन ज़मानत तो मिलेगी ही ।

अभी रमज़ान है "रकमिश" निगाहें रख रहीं रोज़ा ।
रहम लाएगा खुद मौला इनायत तो मिलेगी ही ।

                            राम केश मिश्र(रकमिश)

नशा ए इश्क

ग़ज़ल   नशा ए इश्क अब छोड़ा न जाए ।  जमाने से मगर उलझा न जाए ।   बड़ी मासूम हैं उसकी अदाएं,   कि मुझसे और अब देखा न जाए ।   गरीबों ...