*ग़ज़ल।विश्व मे प्यार की दुनिया बसा ।*
विश्व मे अब प्यार की दुनियां बसा ।
आज चल तू नेह का दीपक जला ।।
क्रोध ईर्ष्या लोभ निज अभिमान को ।
दुर्व्यसन की भावना जड़ से मिटा ।।
हो सके तो बाट ले दुख गैर का ।
भूल कर भी दिल किसी का ना दुखा ।।
जो मिले दिव्यांग सहते रुग्णता ।।
मांग ले उनके लिये रब से दुआ ।।
छोड़ आशा को बने जो आलसी ।
हौसलों की रोशनी उनको दिखा ।।
भावना पनपा सदा ही शांति की ।
विश्व का कर बाद तेरा हो भला ।।
'राम' तेरा जन्म हो जाये सफल ।
नाम से जादा किसी को क्या मिला ।।
राम केश मिश्र
सुल्तानपुर उत्तर प्रदेश
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