।।ग़ज़ल।।उन्हें मोती नज़र आया।।
बिना शिक़वे शिकायत के पहुँच उनके शहर आया ।।
लगी थी इश्क की बाजी चला उनके भी घर आया ।।
निकल कर सामने आये बिना परदे के महफ़िल में ।।
भरी महफ़िल दिवानो से दीवानापन उभर आया ।।
लगी बोली वहा पर थी मुहब्बत में गुनाहो की ।।
जिन्होंने बेवफ़ाई की उन्हें ही बेख़बर पाया ।।
उन्हें था फ़ैसला करना जिन्होंने रब से मांगा था ।।
मुझे ,मेरी मुहब्बत को , मेरा तो गम बिखर आया ।।
नहाकर हम निकल आये खुदी के गम के झरने से ।।
लगे थे अश्क चेहरे पर उन्हें मोती नजर आया ।।
.......R.K.M
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