शनिवार, 14 जून 2014

।।गुनाह।।

               ।।  गुनाह।।

सिर्फ होठों पर मुस्कुराहट नही देखी जाती ।।
वक्त अपना हो तो राहत नही देखी जाती ।।1।।

जो दूर है यकीनन साथ न निभा पायेगे।।
उसके पास आने की आहट नही देखी जाती ।।2।। 

भले ही तुम उसे प्यार करते हो दिल से ।। 
पर बेकसी, बेबसी मे चाहत नही देखी जाती ।। 3।। 

ए दोस्त मत कर  गुनाह हमवफा बनने का ।।
हमवफा की छटपटाहट मुझसे नही देखी जाती ।।4।। 

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