गुरुवार, 26 जून 2014

गज़ल(एक तन्हा)

         ।।गज़ल(एक तन्हा) ।। 

हम तो कहते हैं हालात एक तन्हा है ।।  
इत्तफाको से मुलाकात एक तन्हा हैं ।।  1।। 

वक्त पर आये तो हैं वक्त की कीमत ।।
वेवक्त वक्त की तादात एक तन्हा है ।।  2।। 

जब विछडना ही है मुकद्दर मे मेरे लिखा ।। 
फिर तो जुदाई की हर बात एक तन्हा है ।। 3।। 

शिकायत क्यो कर तकदीर से अपने ।। 
इसकी तो हर वारदात एक तन्हा हैं ।। 4।। 

फिक्र मत कर दोस्त लौट कर फिर  आयेगे ।। 
आँखों से हुई हर बरसात एक तन्हा है ।।5।। 

                      ***

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

नशा ए इश्क

ग़ज़ल   नशा ए इश्क अब छोड़ा न जाए ।  जमाने से मगर उलझा न जाए ।   बड़ी मासूम हैं उसकी अदाएं,   कि मुझसे और अब देखा न जाए ।   गरीबों ...