।।तन्हा।।
जब किसी का तन्हा बहुत करीब होता हैं ।।
तो वह पल भी कितना अजीब होता हैं ।।1।।
बदल जाती है उम्र भर की रौनक गम मे।।
और एहसास भी काफ़ी कुछ गरीब होता है ।।2।।
होने को तो होतीं हैं तनहाइयाँ उनके साथ ।।
पर मंजर हर हस्र का बेतरकीब होता है ।।3।।
फिक्र न कर ऐ मेरे दोस्त इस दर्द की ।।
ये लम्हा किसी-किसी को ही नसीब होता हैं ।।4।।
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