मंगलवार, 10 जून 2014

।।सबब।।

                 ।।सबब।।

किसी आदमी को दिल-ए-दर्द जब होता हैं ।।
वही उसकी जिंदगी का सक्त  सबब होता है ।।1।।

सबक तो सीखते हैं हम ताउम्र तजुर्बे से ।। 
खुदगर्ज़ जिंदगी मे सही वक्त कब होता हैं ।। 2।। 

हम खुद को छोड़ करके ही तहकीक करते है ।।
न जाने गैरों मे क्यों इतना तलब होता हैं ।। 3।।

हमवफाओ की तो यहाँ परवाह नहीं जर से ।। 
हमदम, हमसफ़र का अब कहां अदब होता है ।।4।।  

पक्के है जिनके वादें, है आहों पे जिनकी मन्नत ।। 
इबादत है जिनकी असली उन्हीं का रब होता हैं ।।5।।

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