अंजाम
ए मेरे दोस्त! अंजाम की परवाह न कर ।।
वक्त आयेगा इंसाफ का गुनाह न कर ।। 1।।
और भी हैं यहाँ हालात के मारे मुसाफ़िर ।।
सिर्फ अपनी ख्वाहिशों को ही आगाह न कर ।।2।।
मन्नतो से बदल जाती है तकदीर यहाँ ।
बेमुरौवत से किसी पर निगाह न कर ।। 3।।
गमो का आगाज़ न कर दिल के आशियाने मे ।।
किसी और के लिये भी गमो की चाह न। कर ।।4 ।।
***
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें