बुधवार, 4 जून 2014

अंजाम-2

                  अंजाम

ए मेरे दोस्त! अंजाम की परवाह न कर ।।
वक्त आयेगा इंसाफ का गुनाह न कर ।। 1।।

और भी हैं यहाँ हालात के मारे मुसाफ़िर ।।
सिर्फ अपनी ख्वाहिशों को ही आगाह न कर ।।2।।

मन्नतो से बदल जाती है तकदीर यहाँ ।
बेमुरौवत से किसी पर निगाह न कर ।। 3।। 

गमो का आगाज़ न कर दिल के आशियाने मे ।।
किसी और के लिये भी गमो की चाह न। कर ।।4 ।। 

                       ***

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