बुधवार, 2 अप्रैल 2014

*इन्तज़ार*

                *इन्तज़ार*

तुम चाहते हो खेलना मेरे नादान दिल से , ।।
और मुझे भी उसी दिन का इन्तजार है ।।1 ।।
                    ***

जब बन ही गया है इरादा मेरा दिल तोड़ने  का ,।। 
तो झूठे प्यार मे अदायें क्यों दिखाती हो ।।2।।
                     ***

जब मुझे हाशिल न हो सकेगा तुम्हारा साथ , ।। 
तो मै तेरी याद का इन्तज़ार क्यों करूँ ।।3।।
                     ***

और खत्म हो गया तेरा इन्तज़ार करना ,।। 
क्योंकि मुझे भी फुर्सत नही अपने दिल के गमो से ।।4।।

                     ***

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

नशा ए इश्क

ग़ज़ल   नशा ए इश्क अब छोड़ा न जाए ।  जमाने से मगर उलझा न जाए ।   बड़ी मासूम हैं उसकी अदाएं,   कि मुझसे और अब देखा न जाए ।   गरीबों ...