मंगलवार, 1 अप्रैल 2014

*उम्मीद*

                *उम्मीद*

मुझे मालूम था कि खफ़ा होगे मुझसे ,
पर उम्मीद न थी उनसे बेवफाई की ।।1।।
                    ***

जब किस्मत ही आजमाने लगी हैं मुझको ,
तो तेरा आजमाना भी तेरी कसम वाजिब हैं  ।।2।।
                     ***

हर बार तो यही हुआ मेरे दिल के साथ ,
जब भी लगाया सिर्फ जख्म मिला हैं इसको ।। 3।।
                     ***
               
अब मेरी वजह से तखलीक न होगी तुमको ,
मेरी नाउम्मीदी पर खुशियाँ मना लेना तुम ।।4।।
                    ***

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