*उम्मीद*
मुझे मालूम था कि खफ़ा होगे मुझसे ,
पर उम्मीद न थी उनसे बेवफाई की ।।1।।
***
जब किस्मत ही आजमाने लगी हैं मुझको ,
तो तेरा आजमाना भी तेरी कसम वाजिब हैं ।।2।।
***
हर बार तो यही हुआ मेरे दिल के साथ ,
जब भी लगाया सिर्फ जख्म मिला हैं इसको ।। 3।।
***
अब मेरी वजह से तखलीक न होगी तुमको ,
मेरी नाउम्मीदी पर खुशियाँ मना लेना तुम ।।4।।
***
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें