रविवार, 18 मई 2014

दोस्ती

दोस्ती इक पल तो इन्तज़ार हम कर नही सकते कभी ताउम्र तो मुमकिन नही है इस हमारी दोस्ती में ।। 1।। फिर भी चाहेंगे तुमकों तुम्हारी तसल्ली के लिये , कि तुम्हें तखलीफ़ न हो इस हमारी दोस्ती मे ।।2।। क्योंकि वक्त तो अपना है नही ,जिंदगी है गैर की , सो इन्तजारो की जगह है न ,इस हमारी दोस्ती में ।।3।। पर यकीनन याद की इक शै जलाता है जिगर , और ताज़ी आहटे है इस हमारी दोस्ती मे ।।4।। लब्ज की कीमत दिलो से तौल ली जाती यहाँ पर, झूठ को मोहलत नही है इस हमारी दोस्ती मे ।।5।। ***

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