हमदर्द
तुम्हें तो इल्म नही होगा तुम्हारी खुशनसीबी पर ,
कि तुम्हारा नाम भी है हमारी बेमुरौवत जिंदगी मे ।। 1।।
वरना किसे परवाह है गैरों की इस भीड़ में ,
जबकि महफिलों में भीडो के जलसे निकलते है ।।2।।
अगर हो पास इतना तो ये फासला क्यों है ,
न जाने कब किसी का बिछड़ने का इरादा हो ।।3।।
तुम्हें तखलीफ होगी पर तुम्हारी कद्र करता कौन हैं ,
किसे फुर्सत यहां पर है तेरा हमदर्द बनने का ।।4।।
सहो हर दर्द अपना तुम किसी से गम को मत बाटो ,
तुम्हारे दर्द का हमदम तुम्हारी जिंदगी ही हैं ।।5।।
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