सोमवार, 19 मई 2014

जिंदगी

                   ।।जिंदगी ।।

जब हमने जीना चाहा कुछ खास  जिंदगी ।।
तब हमको लगी बिल्कुल बकवास  जिंदगी ।।1 ।

जिन पर यकी था मुझको बर्बाद कर गये ।।
अब कैसे करें गैरों पर बिश्वास जिंदगी ।।2।। 

हर अजनबी के तेवर हर दोस्तो की हरकत ।।
कर  रही है सब कुछ एहसास जिंदगी ।।3।।

मै ढूँढने निकला था खुद शाहिलो पर हमदम ।।
अब बन गयी है खुद ही तालाश जिंदगी ।।4।। 

यकीनन तुम्हें भी आ जायेगा यकी यारों ।। 
जब हो जायेगी  गम की आवास जिंदगी ।।5।। 

                       ***

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