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नशा ए इश्क
ग़ज़ल नशा ए इश्क अब छोड़ा न जाए । जमाने से मगर उलझा न जाए । बड़ी मासूम हैं उसकी अदाएं, कि मुझसे और अब देखा न जाए । गरीबों ...
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ग़ज़ल।मौत भी अपमान की ।। खिल्लियां उड़ने लगी है ऐ खुदा ईमान की । जीत अब होने लगी है बेवज़ह बेईमान की ।। मुजरिमों के लिये है इज्जतें बेशक़ रिह...
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*नाम* बड़ा आसान होता हैं किसी से वायदा करना , ये वक्त है कि सबको झूठा बना देता हैं ।।1।। *** ...
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ग़ज़ल..... आज ले चलते है उन वादियों में , जहा पर बेफ़िक्र निग़ाहों की चहलक़दमी होती है । जहा बन्दगी नही तश्नगी होती है । वो चेहरा जो ...
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