मंगलवार, 25 नवंबर 2014

।।दोस्ती:2।।

                 ।।दोस्ती:2।।


हर किसी ने कह दिया दोस्त है दोस्त है ।।
पर दोस्तों !! ए दोस्ती जीना सिखाती है ।।

गर नही तो फिक्र कर अब ही अपने दोस्तों की ।।
याद ही वह शौक है जो हमें अपना बनाती है ।। 


दोस्ती की दुकानों  पर मिले तो क्या हुआ ।।
दूर रहकर भी बडी दूरी मिटाती है ।।

इल्म कर ले हर कोई है दोस्त के काबिल ।।
गैर के खातिर ये तो किस्मत लुटाती है ।। 


कौन कहता है यहाँ मोहलत नहीं मिलती मुझे ।।
ये तो उम्र भर दिल में रहना सिखाती है ।।

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