हजारों बार गिरा हैं गुलदस्ता गुलदान से बाहर ।
करे क्या माली हवायें आ ही जाती हैं ।।
***
गुजार देते हम भी तुम्हारे साथ कुछ पल ।
करे क्या जबाना मिलने नहीं देता ।।
***
मिलेंगी वादियों मे मेरे आने की आहट ।
जरा गौर से सुनियेगा आवाज़ मद्दिम होगी ।।
***
मजबूर दिल को बेदर्द मत समझना ।
दर्द होता हैं मगर कोई समझता नहीं ।।
***
दिल को तसल्ली देता हूँ कि बरसेगा कभी सावन ।
पर बरसों गुजर गये सावने इन्तज़ार मे ।।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें