शनिवार, 8 फ़रवरी 2014

*शायरी -1*


हजारों बार गिरा हैं गुलदस्ता गुलदान से बाहर ।
करे क्या माली हवायें आ ही जाती हैं ।।

                     ***

गुजार देते हम भी तुम्हारे साथ कुछ पल ।
करे क्या जबाना मिलने नहीं देता ।।

                      ***
मिलेंगी वादियों मे मेरे आने की आहट ।
जरा गौर से सुनियेगा आवाज़ मद्दिम होगी ।।

                       ***

मजबूर दिल को बेदर्द मत समझना ।
दर्द होता हैं मगर कोई समझता नहीं ।।

                        ***

दिल को तसल्ली देता हूँ कि बरसेगा कभी सावन ।
पर बरसों गुजर गये सावने इन्तज़ार मे ।।

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