सोमवार, 1 दिसंबर 2014

गजल।।एक दिल।।

              गजल ।।एक दिल।।

दिल एक था पर टुकड़े हजार हो गये ।।
जब हर जगह दिल के बाजार हो गये ।।1।।

ओश की तरह ढह गये छोड़ कर पलके ।।
अपने आसू भी आजकल गद्दार हो गये ।। 2।।

न जाने कितनी गुमनाम ही दफन हो गयी हसरते ।।
जख्म लगा तो दिल बेकार हो गये ।। 3।।

वक्त ही वक्त था पर अपना न था ।।
जब हम तन्हाई के शिकार हो गये ।।4।।

खत्म हो गया सिलसिला अपनाने का ए दोस्त !!
जब खुद ही बिछडने के आसार हो गये ।। 5।।


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