मंगलवार, 5 सितंबर 2017

जहां मे ज्ञान का पौधा सदा बोता रहा शिक्षक ।

,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,ग़ज़ल ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

    सजता राह जीवन की स्वंय खोता रहा शिक्षक ।
    जहां मे ज्ञान का पौधा सदा बोता रहा  शिक्षक ।

    हमारी एक ग़लती  पर  हमे  वो  डांटने  लगता ।
    दिखाकर राह सच झूठी सज़ा देता रहा शिक्षक ।

    मिले जो कामयाबी  तो वो पीठें  थपथपाता  है ।
    हमारी हार सुनकर के  दुखी होता रहा  शिक्षक ।

    बने हम नागरिक सच्चे  करें हम  देश की सेवा ।
    हमेशा  देश  भक्ति मे  हमे  धोता रहा  शिक्षक ।

    सिखाता पाठ जीवन के मिटाता अन्ध हृदय से ।
    महापुरुषों के साये को ख़ुदी ढ़ोता रहा शिक्षक ।

    पिता, माता ,सखा, भाई तनय सा प्यार देता  है ।
    सभी रिस्तो के सागर मे लगा गोता रहा शिक्षक ।

    करेंगे नाम दुनियां मे यही उम्मीद रख "रकमिश ।
    चिरंगुन हम बना  पंछी  हमे  सेता  रहा  शिक्षक । 

                         राम केश मिश्र
                     सुलतानपुर उत्तर प्रदेश

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

नशा ए इश्क

ग़ज़ल   नशा ए इश्क अब छोड़ा न जाए ।  जमाने से मगर उलझा न जाए ।   बड़ी मासूम हैं उसकी अदाएं,   कि मुझसे और अब देखा न जाए ।   गरीबों ...