रविवार, 24 सितंबर 2017

आग बदले कु बुझाना चाहिए ।

""'''''''''''''''''''""""""""""""""ग़ज़ल""""""""''''"'''""""""""""""

      आग़  बदले  की  बुझाना  चाहिए ।
      हर किसी को  मुस्कुराना  चाहिए ।

      नफ़रतों से ज़ख़्म ही मिलता सदा ।
      रंजिशों  को  भूल   जाना  चाहिये ।

      जिंदगी बस चार दिन की चाँदनी  ।
      प्यार  से इसको  सजाना  चाहिए ।

      मंज़िलों को छोड़कर दहलीज़ पर ।
      फ़र्ज़  दुनियां  मे  चुकाना  चाहिए ।

      फ़र्क जिसको है नही सच झूठ का ।
      आइना   उसको  दिखाना  चाहिए ।

      छोड़कर अब  इश्क़ मे  हैवानियत ।
      दिल्लगी  दिल से  निभाना चाहिए ।

      हो रही "रकमिश  बड़ी  तौहीनियां ।
      अश्मिता  सबको  बचाना  चाहिए ।

                      ✍ रकमिश सुल्तानपुरी

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