::::::::::::::::::::::::::ग़ज़ल :::::::::::::::::::::::::
तेरा ये गमसुदा होना हक़ीक़त मे बहाना है ।
तुम्हे मालूम हो न हो ये तेरा दिल दिवाना है ।
तिरी परछाइयां तक अब अदायें पेश कर देती ।
रुकी खामोशियों मे भी ग़ज़ब मौसम सुहाना है ।
ख़ुदी दिन रात पढ़ता है तेरे चेहरे की मदहोशी ।
किसी दिन रात को आकर अदा तेरी चुराना है ।
रवायत है, अदावत है, वफ़ासत है मुहब्बत ये ।
अमानत है मिटा तन्हा ख़ुदी का दिल लुटाना है ।
पिलाती झील सी आंखे नसे मे घूँट भर आहे ।
नज़र की झील मे ख़ोकर तिरी तस्वीर पाना है ।
चलो चलते है साहिल पर करेंगे प्यार के चर्चे ।
किसी की जान ले लेगा जो तेरा मुस्कुराना है ।
नज़र के ही इशारों से ज़रा दे हौसला 'रकमिश ।
निभा रस्में मुहब्बत की तुम्हे अपना बनाना है ।
रकमिश सुल्तानपुरी
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