दो दिलों की है निसानी दोस्ती ।
हो गयी अपनी पुरानी दोस्ती ।
अश्क़ हमने मिलके पोंछे है बहुत ।
बन गयी अब जिंदगानी दोस्ती ।
रंजिशे आयी दरारें न पड़ी ।
याद बन आयी सुहानी दोस्ती ।
क़हक़हे जमने भुलाया उम्रभर ।
बन गयी मसलन कहानी दोस्ती ।
गमभरे लम्हों को आने न दिया ।
थी ख़ुसी मे आसमानी दोस्ती ।
रफ़्तरफ़्ता पास आने हम लगे ।
प्यार मे बदली सयानी दोस्ती ।
फ़ासला रकमिश दिलों का है नही ।
है सदा बेशक़ निभानी दोस्ती ।
✍रकमिश सुल्तानपुरी
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