गीतिका।तोटक छंद में ।
सच पे नित वार करे झगड़ा ।
तम का अधिकार धरे झगड़ा ।
कलियोग वियोग बढ़े विपदा ।
सुख का परकास हरे झगड़ा ।
अपराध कुकर्म कुसंगति से ।
खल रूप अनेक धरे झगड़ा ।
रहता परिवार दुखी सबका ।
जिसके घर भोर भये झगड़ा ।
घर गाँव सगे सब दूर रहे ।
मन मे विषभाव भरे झगड़ा ।
बस नेह भरो नित जी वन मे ।
कुछ काम करो कि टरे झगड़ा ।
राम केश मिश्र
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