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गुरुवार, 8 जून 2017
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नशा ए इश्क
ग़ज़ल नशा ए इश्क अब छोड़ा न जाए । जमाने से मगर उलझा न जाए । बड़ी मासूम हैं उसकी अदाएं, कि मुझसे और अब देखा न जाए । गरीबों ...
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ग़ज़ल।मौत भी अपमान की ।। खिल्लियां उड़ने लगी है ऐ खुदा ईमान की । जीत अब होने लगी है बेवज़ह बेईमान की ।। मुजरिमों के लिये है इज्जतें बेशक़ रिह...
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ग़ज़ल।मैं भी सितारा। मैं भी था सितारों में जगमगाने वालों ।। थम जाने दो आंशू गीत गाने वालो ।। अपने लब्ज़ो की बात तो बया कर दू । ...
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ग़ज़ल।। मुहब्बत जब नज़र आती ।। गवाही की जरूरत क्या जमानत जब नजर आती । वफ़ाई की तमन्ना क्यों मुहब्बत जब नज़र आती ।। गुरु है वो , खुदा , र...
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