गुरुवार, 8 जून 2017

क्या प्रेम है जहाँ मे करके दिखा दिया ।

            *एक ग़ज़ल की कोशिश*

क्या प्रेम है जहाँ मे करके दिखा दिया ।
होता अमर है कैसे मरके दिखा दिया ।। 

यहाँ लोग जी रहे है इश्क़ की बदौलत ।
राँझा ने उम्रभर आहे भरके दिखा दिया ।।

लैला भी चाहती थी मजनूं को दर्द न हो ।
वो दर्द थी मुहब्बत हरके दिखा दिया ।।

राधा रही दिवानी शर्मोहया को छोड़ा ।
मीरा ने इस जहाँ मे तरके दिखा दिया । 

रोया था हर दिवाना तड़पी थी जिंदगी ।
ख़ूने ज़िगर से आंशू ढरके दिखा दिया ।।

ऐ शौक़ है ख़ुदा की हर चीज़ लाज़िमी है ।
है बेज़ुबान तूफ़ां छल के दिखा दिया ।।

ऐ 'रक,मिली जुदाई साहिलों के माफ़िक़ ।
थे रहनुमां वे इश्क़ पड़के दिखा दिया ।। 

                         @राम केश मिश्र

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

नशा ए इश्क

ग़ज़ल   नशा ए इश्क अब छोड़ा न जाए ।  जमाने से मगर उलझा न जाए ।   बड़ी मासूम हैं उसकी अदाएं,   कि मुझसे और अब देखा न जाए ।   गरीबों ...