सोमवार, 12 जून 2017

दोस्तों के लिये मैं रुका रह गया ।


       @ ग़ज़ल।दोस्ती के लिये मै रुका रह गया ।@

दोस्ती के लिये मै रुका रह गया ।
अश्क़ आंखों मे मेरे छुपा रह गया ।।

इश्क़ मे बेक़सी की हवा के लिए ।
एक अर्से से पाता सज़ा रह गया ।।

इश्क़ को जुस्तजू रास आयी नही ।
लाख़ चाहा मग़र फ़ासला रह गया ।।

लव्ज़ होठों पर आकर रुके से रहे ।
राज़ दिल का दिलों मे छुपा रह गया ।। 

सबको तौफा मिला दोस्ती का यहाँ ।
दोस्त ख़ामोश दिन देखता रह गया ।। 

साथ जत्था चला काफ़िलों का मिरे ।
पर अकेला यहाँ हर दफ़ा रह गया ।।

सिर्फ़ तन्हा मिला ज़िन्दगी मे मुझे ।
दर्द ही एक रकमिश, दवा रह गया ।। 

                                राम केश मिश्र

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