मंगलवार, 13 जून 2017

गीतिका।मुझको अपना यार समझ ले ।

गीतिका

मुझको ख़ुद का प्यार समझ ले ।
बिन कांटो का हार समझ ले ।। 

टूट गया तो गया काम से ।
इकतारा का तार समझ ले ।

दिल को तेरे परख रहा हूं  ।
चाहे अत्याचार समझ ले ।। 

एहसासों का रूप बनाता ।
भावों का सृंगार समझ ले ।

सन्देहों की जाल बिछाकर ।
डूब रहा मझधार समझ ले ।

डरा हुआ हूं ख़ामोशी से ।
डर को मेरी हार समझ ले ।।

मुस्कानों की एक अदा पर ।
बेशक़ हूं बीमार समझ ले ।। 

रकमिश तेरा हुआ दिवाना ।
चाहे तो बेकार समझ ले ।।

                       
                   रकमिश सुल्तानपुरी


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