बुधवार, 14 जून 2017

इश्क़ मे लगने लगी है बोलियां ।

     ग़ज़ल।इश्क़ मे लगने लगी है बोलियां ।।

प्यार मे आयी ग़मो की आधियां ।
हो गयी वीरान दिल की बस्तियां ।। 

आँशुओ के ढेर पर सोना पड़ा ।
काम न आयी हमारी अर्जियां ।।

फ़लसफ़े हमने सुने थे प्यार के ।
इश्क़ मे लगने लगी है बोलियां ।।

वक़्त का मारा हुआ है आदमी ।
कौन करता है वफ़ा मे गलतियां ।।

एकतरफा प्यार तो होता नही ।।
दोनों हाथों से बजी है तालियां ।। 

आजमाना तू मुझे अब छोड़ दे ।
बीत जाएगी जफ़ा मे सर्दियां ।।

सुन तिरा रकमिश यहां बीमार है ।
ख़ुद वहां पर कर रहे हो मस्तियां ।।

                      -राम केश मिश्र
             

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