गज़ल।दर्द वो बोती रही।
इश्क़ के हालात को खोती रही ।
जिन्दगी में दर्द वो बोती रही ।
पास आया था लिए बेबाकिया ।
वक्त उसको न मिला सोती रही ।।
मिल सकी न प्यार की परछाइयाँ ।
बेबस आँखे गमसुदा रोती रही ।
बेसक सजी थी उम्रभर तन्हाइयां ।
हार दिल की हर तरफ होती रही ।
एक पल मिलना मुक़र्रर न हुआ ।
बेरुखी की बात वो ढोती रही ।
जख़्म गहरा हो चला'रकमिश"तेरा ।
जब मिली बस दर्द से धोती रही ।
रकमिश सुल्तानपुरी