ग़ज़ल।गुनाहों की कहानी है ।
करो जो प्यार तो समझो गुनाहों की कहानी है ।
दिल ऐ बेबस महज़ दिलकश अदाओं की निशानी है ।
वफ़ा ऐ इश्क़ में देखा तबाही से भरे मंज़र ।
ख़ुसी के एक पल की भी हमें कीमत चुकानी है ।
झलक ज़न्नत की पाया तो जली ग़म की मसालें थी ।
बुझे न अश्क़ मसलन अब बचा आँखों में पानी है ।।
ख़्वाहिस रह नही पाती कभी महफूज़ साहिल पर ।
वही दिल तोड़ने की सब बनी रश्मे पुरानी हैं ।
यहाँ हालात तकलीफे मुक़र्रर कर दिये जाते ।
यकीनन मौत से पहले मिली यादें रूहानी हैं ।
ग़मे तन्हाईयां "रकमिश" सकूनत की हवा देती ।
क़सिस ऐ दर्द में बेकस जवानी की नदानी है ।
रकमिश सुल्तानपुरी
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