ग़ज़ल।उन्हें साहिल नही मिलता।
इलाही छोड़ के नफ़रत दिलों से दिल नही मिलता ।
भरी इस भीड़ के दरम्यां कोई हमदिल नही मिलता ।
जहा देखा मिली हमको निगाहें दर्द में बेबस ।
भटकते दर व् दर बेघर उन्हें महफ़िल नही मिलता ।
गमे हालात बरपी है मुक़द्दर बेवफा निकला ।
उम्रभर प्यार करते पर कोई हासिल नही मिलता ।
इरादे इश्क़ में मशलन बने है वक्त के चश्के ।
वादे टूटते हर पल ग़मे बोझिल नही मिलता ।
यक़ीनन प्यार की मजलिश में डूबे लोग क़ायल है ।
भरे है लोग बेशक़ पर कोई क़ाबिल नही मिलता ।
सहोगे कब तलक 'रकमिश' उनके प्यार के सदमे ।
तुम्हें मंजिल नही मिलती उन्हेँ साहिल नही मिलता ।।
@रकमिश