शुक्रवार, 11 दिसंबर 2015

ग़ज़ल।उन्हें साहिल नही मिलता।

   ग़ज़ल।उन्हें साहिल नही मिलता।

इलाही छोड़ के नफ़रत दिलों से दिल नही मिलता ।
भरी इस भीड़ के दरम्यां कोई हमदिल नही मिलता ।

जहा देखा मिली हमको निगाहें दर्द में बेबस ।
भटकते दर व् दर बेघर उन्हें महफ़िल नही मिलता ।

गमे हालात बरपी है मुक़द्दर बेवफा निकला ।
उम्रभर प्यार करते पर कोई हासिल नही मिलता ।

इरादे इश्क़ में मशलन बने है वक्त के चश्के ।
वादे टूटते हर पल ग़मे बोझिल नही मिलता ।

यक़ीनन प्यार की मजलिश में डूबे लोग क़ायल है ।
भरे है लोग बेशक़ पर कोई क़ाबिल नही मिलता ।

सहोगे कब तलक 'रकमिश' उनके प्यार के सदमे ।
तुम्हें मंजिल नही मिलती उन्हेँ साहिल नही मिलता ।। 

                                @रकमिश

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

नशा ए इश्क

ग़ज़ल   नशा ए इश्क अब छोड़ा न जाए ।  जमाने से मगर उलझा न जाए ।   बड़ी मासूम हैं उसकी अदाएं,   कि मुझसे और अब देखा न जाए ।   गरीबों ...