बुधवार, 30 अगस्त 2017

सबका सुख दुख से नाता है ।

,गीतिका ।

    जो  जग मे  जीवन पाता  है ।
    भौतिकता मे  ढल  जाता  है ।

    राजा   हो  या  दुर्बल  निर्धन ।
    सब का सुख दुख से नाता है ।

    कष्टों मे  साहस  भर  दे  जो ।
    वह सच मे अपना  भ्राता  है ।

    नर तन पशु पंछी जड़ चेतन ।
    दुख   पाते  ही  मुरझाता  है ।

    जीवन इक सिक्का दो  पहलू ।
    रकमिश खुद को समझाता है ।

                     Ram Kesh Mishra

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